माता चिंतपूर्णी मंदिर में चंदन की टोकरी की पुनर्स्थापना करते हुए श्रद्धालु और पुजारी। संवाद
- फोटो : कुत्ते के हमले में घायल शिव कुमारी।
भरवाईं (ऊना)। चिंतपूर्णी मंदिर में माता की जयंती के अवसर पर वीरवार को श्रद्धा, परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में वर्षों पुरानी ऐतिहासिक चंदन की टोकरी को एक नई और भव्य सागवान की पालकी में विधिवत रूप से पुनर्स्थापित किया गया। इस विशेष आयोजन ने श्रद्धालुओं की आस्था को और गहरा कर दिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस चंदन की टोकरी का उपयोग पुजारियों द्वारा माता रानी को शयन करवाने की परंपरा में किया जाता रहा है। कुछ वर्ष पहले कर्नाटक के मैसूर से एक श्रद्धालु द्वारा यह टोकरी भेंट की गई थी।
इससे पूर्व मंदिर में पारंपरिक रूप से बांस की टोकरी का ही उपयोग होता था। समय के साथ चंदन की टोकरी में दरारें आने लगीं, जिसे मंदिर के पुजारियों ने माता की इच्छा का संकेत मानते हुए दोबारा पुरानी परंपरा के अनुसार बांस की टोकरी का उपयोग शुरू कर दिया। वहीं इस ऐतिहासिक चंदन की टोकरी को सुरक्षित रूप से संरक्षित रखा गया। इसी क्रम में पंजाब के मुक्तसर से आए श्रद्धालु शमी बाबा ने मंदिर न्यास को सागवान की लकड़ी से निर्मित एक नई भव्य पालकी भेंट की। मजबूत और आकर्षक नक्काशी वाली इस पालकी में चंदन की टोकरी को स्थापित कर उसे नया स्वरूप दिया गया। स्थापना का कार्य पूर्ण विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न हुआ।
मंदिर के पुजारी साहिल कालिया और महावीर कालिया ने विशेष पूजा-अर्चना के बाद इस पवित्र टोकरी को पालकी में स्थापित किया। अब यह धरोहर मंदिर के मुख्य हॉल में रखी गई है, यहां श्रद्धालु इसके दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जल्द ही यहां एक सूचनापट्ट भी लगाया जाएगा, इसमें टोकरी के इतिहास, महत्व और शयन परंपरा से जुड़ी पूरी जानकारी दी जाएगी।