कई जगह जलभराव से फसल बर्बाद
दोबारा मौसम खराब होने से किसानों की परेशानी बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में जोरदार बारिश का सबसे अधिक असर मक्की की खेती पर हुआ। कई स्थानों पर खेत जलमग्न होने और पानी के तेज बहाव की चपेट में आने से फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। जबकि, कई क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां फसल को बचाने के लिए जरूरी दवाओं के छिड़काव की जरूरत है। वहीं, शुक्रवार को मौसम फिर खराब हो गया है।
जानकारी के अनुसार जिले में करीब 25000 हेक्टेयर जमीन पर मक्की की खेती होती है। इसमें अगेती और पारंपरिक फसल शामिल है। अगेती मक्की की फसल 50 फीसदी तक तैयार हो चुकी है और पारंपरिक मक्की अभी शुरुआती चरण में है। जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के शुरुआती दिनों में बारिश का दौर लगातार जारी है। जबकि, फसलों को बारिश के साथ धूप की आवश्यकता रहती है। बीते 15 दिन से धूप कुछ समय के लिए ही खिल रही और शेष दिन बादल छाने और बारिश का होना जारी है। खराब मौसम के बीच किसान फसल को बचाने के लिए खाद और जरूरी कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं कर रहे। छिड़काव का असर धूप की मौजूदगी में अच्छा रहता है।
किसान रविंद्र कुमार, अरुण कुमार, राजेश शर्मा, रितेश सैनी, दीपक सैनी, संदीप कुमार, नरोत्तम शर्मा ने कहा कि मक्की की फसल के लिए बारिश का होना तो जरूरी है लेकिन कई दिनों से धूप न खिलने से फसल पर खतरा मंडराने लगा है। फसल पर सुंडी और खरपतवारों की मार पड़ रही। इससे फसल की वृद्धि प्रभावित होने लगी है। कहा कि आगे आने वाले दिनों में मौसम की यही स्थिति रही तो फसल की पैदावार घटना तय है।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि मक्की की फसल बारिश के कारण अच्छी तैयार हो रही। आने वाले दिनों में धूप की दरकार है। उम्मीद है कि जल्द मौसम साफ होगा, जिससे फसल को पर्याप्त धूप मिल सके। कहा कि किसान फसल से जुड़ी किसी भी परेशानी के हल को लेकर विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।