ऊना। जिला ऊना में आयोजित प्रधानों और उपप्रधानों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान ग्राम पंचायतों में उपप्रधानों की भूमिका और अधिकारों को लेकर चर्चा होती रही।
समारोह में मौजूद कई निर्वाचित प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि जब प्रधान और उपप्रधान दोनों जनता द्वारा बराबर चुने जाते हैं, दोनों को समान रूप से शपथ दिलाई जाती है और आधिकारिक मोहर भी प्रदान की जाती है तो फिर उपप्रधानों को पंचायत कार्यों में पर्याप्त अधिकार क्यों नहीं दिए गए हैं।
प्रतिनिधियों का कहना है कि ग्राम पंचायत प्रधान के बराबर वार्डों से जीतकर आने वाले उपप्रधान भी जनता की अपेक्षाओं और विकास कार्यों की जिम्मेदारियों के साथ चुने जाते हैं, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में अधिकांश प्रशासनिक, निर्माण कार्य और वित्तीय शक्तियां केवल प्रधान तक सीमित हैं। इससे उपप्रधान अपनी भूमिका का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर पाते हैं।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान यह मांग प्रमुखता से उठी कि प्रदेश सरकार को पंचायत व्यवस्था में सुधार करते हुए उपप्रधानों को भी पंचायत के कार्यों में भागीदारी और निर्णय लेने की शक्तियां प्रदान करनी चाहिए।
प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि प्रधान और उपप्रधान को समान अधिकार देना संभव नहीं है तो कम से कम पंचायत के किसी विशेष मद, योजना या विभागीय कार्य की जिम्मेदारी उपप्रधान को निर्धारित की जानी चाहिए ताकि वह भी पंचायत विकास में सक्रिय भूमिका निभा सके।
निर्वाचित प्रतिनिधियों का मानना है कि इससे पंचायतों में कार्यों का बेहतर विभाजन होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
साथ ही उपप्रधानों को भी जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभाने का अवसर मिलेगा। प्रतिनिधियों ने प्रदेश सरकार से पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बनाने के लिए उपप्रधानों के अधिकारों और दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की मांग की है।