संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। जिले के 142 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में अध्यापकों के पद तो खाली हैं, लेकिन इनमें से 38 स्कूल ऐसे हैं, जहां प्रधानाचार्य ही नहीं हैं। इस कारण स्कूल का प्रबंधन अतिरिक्त कार्यभार संभालने वाले अध्यापक के जिम्मे है।
इस कारण अतिरिक्त कार्यभार की जिम्मेदारी संभाल रहे अध्यापकों को अपना विषय बच्चों को पढ़ाने का समय नहीं मिल रहा। उनका सारा समय प्रबंधन में ही बीत रहा है।
सीधे तौर पर इससे स्कूलों की व्यवस्था तो बनी रहती है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जानकारी के अनुसार प्रधानाचार्यों को पद दो वर्ष से खाली चल रहे हैं। स्कूल प्रबंधन समितियों ने भी कई बार यह मुद्दा उठाया, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
कई स्कूलों में प्रवक्ताओं के पद भी खाली पडे हैं। इंचार्ज प्रधानाचार्य को उनका भी समायोजन करना पड़ता है। कई बार तो किसी अन्य विषय के अध्यापक को बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा। प्रधानाचार्य नहीं होने एक कारण संस्थान के प्रबंधन में भी कमियां आई हैं। यदि सस्थान में मुखिया ही नहीं होगा, तो कैसे प्रबंधन ठीक चलेगा। विद्यालय का पत्राचार भी विभाग से करना होता है।
इसके तहत वेतन और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के केस भी सेटल करने होते हैं। अधिकतर समय इन्हीं कामों में बीत रहा है। इससे इंचार्ज प्रधानाचार्यों को अपना विषय या अन्य प्रबंधन देखने में मुश्किल आ रही है।
जिले की कुछ सकूल प्रबंधन समितियों के प्रधान और सदस्यों ममता देवी, गुलशन कुमार, जीत कुमार, नरदेव सिंह तथा आशारानी का कहना है कि बिना प्रधानाचार्य के सूने पड़े हैं। इससे शिक्षा के स्तर में भी कमी आई है। एक तरफ सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है। दूसरी ओर वर्षों से पद खाली पड़े हैं।
हेड मास्टर एवं प्रधानाचार्य संगठन के जिला अध्यक्ष नरेश शर्मा महासचिव विवेक दत्ता ने भी खाली पड़े प्रधानाचार्य को भरने की सरकार से अपील की। ताकि विद्यालयों के प्रबंधन में और कुशलता आए व शिक्षा के स्तर में बेहतर सुधार हो सके।