वन मंडलाधिकारी बोले- न मानने पर होगी कानूनी कार्रवाई
हर गांव, शिक्षण संस्थान सहित पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम होंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगाणा (ऊना)। खेतों और घासनियों में आग लगाने से पहले अब विभाग से अनुमति लेनी होगी। वन मंडलाधिकारी सुशील राणा ने गर्मियों में जंगलों को आग से बचाने के लिए ये निर्देश दिए हैं। उपमंडल बंगाणा क्षेत्र की रामगढ़ धार, बंगाणा रेंज, पिपलू की सोहलासिंगीधार, ध्यूसंर के जंगल, हरोट, खुरवाई ककराणा, चौकीमन्यार, अकोई धार, सोहारी और कारू रेंज के तहत पड़ते सरकारी जंगलों को आग से बचाने के लिए यह निर्णय लिया है। वन विभाग की ओर से हर गांव, शिक्षण संस्थान सहित पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि वन संपदा को आग से बचाया जा सके। वहीं, जो लोग वन संपदा को नुकसान पहुंचाते हुए पकड़े जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है। वन मंडलाधिकारी सुशील राणा ने बताया कि वन विभाग की टीमें लगातार अलग-अलग स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहीं हैं। शिक्षण संस्थान, पंचायत स्तर और हर गांव में लोगों को आग न लगाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। वन मित्रों को भी आग बुझाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अपनी मलकीयत भूमि में घासनियों तथा खेतों में आग लगाने से पहले प्रशासन से परमिशन लेनी पड़ेगी अन्यथा आग लगाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने इस पर अपने-अपने विचार साझा किए।
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तनोह से किसान नेता देसराज मोदगिल का कहना है कि वन हैं तो हम हैं। इसलिए हम सभी का दायित्व बनता है कि वन संपदा को नुकसान न पहुंचाए। अगर हरे भरे जंगल होंगे, तभी हम सब सुरक्षित रहेंगे। वरना सांस लेने में दिक्कत आएगी।
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पीपलू से बीडीसी सदस्य राज कुमार मनकोटिया का कहना है कि सरकारी वन संपदा को बचाना केवल वन विभाग की ही जिम्मेदारी नहीं है। हम सब की जिम्मेदारी बनती है। इसलिए कोई भी व्यक्ति न ही अपने खेतोंमें और न ही जंगल में आग लगाएगा। इसके लिए हम खुद भी लोगों को पंचायत स्तर पर जागरूक कर रहे हैं।
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अम्बेहडा कृषि सहकारी सभा के सचिव विजय शर्मा का कहना है कि अगर सरकारी जंगलों को सुरक्षित रखना है तो हम सभी को मिलकर सहयोग करना होगा। जो भी व्यक्ति जंगल या उसके आसपास आग लगाता हुआ पकड़ा जाए, उसे खुद पुलिस या वन विभाग को सूचना देकर उनके हवाले करें और ऐसे लोगों को सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
अरलू के समाजसेवी रछपाल सिंह राणा का कहना है कि जंगल में आग लगती नहीं है बल्कि लगाई जाती है। मधुमक्खियों का शहद निकालने वाले भी गोदी जंगल में फेंक कर चले जाते हैं। जिससे गोदी धीरे-धीरे आग पकड़ लेती है। लाखों की वन संपदा सहित सहित सैकड़ों जीव जंतु जल कर राख हो जाते हैं और गर्मियों में जो व्यक्ति भी बंदूक लेकर मिले, ऐसे लोगों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।