बंगाणा (ऊना)। जिला प्रशासन द्वारा हाल ही में स्कूलों की समयसारिणी में किए गए बदलाव को लेकर अभिभावकों में निराशा है। अभिभावकों का कहना है कि समयसारिणी में बदलाव के कारण बच्चों को स्कूल पहुंचने और घर पहुंचने के लिए परिवहन सुविधा न मिलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को क्षेत्र के हरोट, हड़थोली, कुखेड़ा, त्यार, बेहलां, राजपुरा, सरोह आदि गांवों के बच्चों को स्कूल आने और जाने में परेशानी झेलनी पड़ी। नई स्कूल समयसारिणी के अनुसार बसें न मिलने से अभिभावकों को बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन द्वारा स्कूल का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक तय किया गया है जबकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह आठ बजे से पहले बसों का संचालन नहीं होता है। दोपहर दो बजे स्कूल में छुट्टी होने के समय भी बच्चों को कोई बस सुविधा उपलब्ध नहीं है। बच्चों को स्कूल आने और जाने में जंगली रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में परिवहन सुविधा न मिलने से बच्चों का लगभग आठ किलोमीटर का लंबा सफर पैदल तय करना सुरक्षित नहीं है, विशेषकर छात्राओं को अधिक परेशानी है। मजबूरन अभिभावकों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है, इससे उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है। उन्होंने प्रशासन से स्कूल समयसारिणी में बदलाव के निर्णय पर दोबारा विचार करने की मांग की है।
क्षेत्र में हर दिन बारिश हो रही है, इसके बावजूद चंद लोगों के कहने पर जिला प्रशासन द्वारा स्कूलों का समय बदल दिया गया। प्रशासन को समयसारिणी में बदलाव से पहले अभिभावकों के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए।
-विनोद शर्मा, लालशाह
सुबह नौ बजे से शाम तीन बजे तक का समय सही था। स्कूल में पढ़ाई-लिखाई करने वाले छात्र-छात्राओं को बसों की सुविधा भी उपलब्ध थी और अभिभावकों को कोई चिंता नहीं थी। -तिलक राज शर्मा , खैरियां
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जिला प्रशासन द्वारा स्कूलों की समयसारिणी में बदलाव करने से अभिभावक और बच्चे दोनों परेशानी में पड़ गए हैं। नई समयसारिणी के अनुसार बच्चों को बस सुविधा नहीं मिल पा रही है। इससे सुबह जल्दी स्कूल पहुंचने और वापस घर लौटने में परेशानी आ रही है।
-ललित साहनी, एसएमसी अध्यक्ष, तलमेहड़ा स्कूल
स्कूलों के समय में बदलाव के निर्णय पर विचार किया जाना चाहिए। गांवों में बिना बस सुविधा से स्कूल स्टाफ और छात्र-छात्राएं कैसे स्कूल आते-जाते हैं, यह बात वही जानते हैं। -कुलदीप सिंह, कोट