विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ऊना में की पत्रकार वार्ता
पंचायतों को भंग कर प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों से किया वंचित
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। ऊना, हमीरपुर, बद्दी में नगर निगम का गठन होने तक सरकार पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्य करवाने के अधिकार दे। चुनाव से एक साल पहले ही पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन कर सरकार ने तानाशाह पूर्ण रवैया अपनाया है। शिमला से नोटिस जारी कर नगर निगम में आयुक्त पद पर नियुक्ति कर दी गई।
उधर, ग्राम पंचायतों को भंग कर दिया गया, लेकिन उसमें यह तय नहीं किया गया कि किसका क्या कार्य होगा। यह बात ऊना सदर के विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सोमवार को ऊना में पत्रकार वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि सरकार के ऐसे रवैये से गांवों में राजनीतिक अराजकता का माहौल है।
उन्होंने कहा कि ऊना की 14 ग्राम पंचायतों को नगर निगम में शामिल किया गया है। जनवरी 2021 में इन ग्राम पंचायतों का गठन किया गया था। जनवरी 2026 तक पंचायतों को कार्यकाल बाकी था, लेकिन नगर निगम के गठन के बहाने इन पंचायतों को भंग करते हुए चुने हुए प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों से वंचित किया जा रहा है। इसका असर पंचायतीराज विभाग की ओर से शुरू किए गए विकास कार्यों के साथ प्रस्तावित विकास कार्यों पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारी विरोध के बावजूद इन सभी पंचायतों को जबरदस्ती नगर निगम में शामिल करने के आदेश जारी कर दिए गए। सरकार ने प्रधान, उपप्रधान, जिला परिषद, बीडीसी सदस्यों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया है। लोकतांत्रिक ढंग से बिना सुने ही उन्हें नगर निगम में मिलाया, फिर पंचायतों को भंग कर दिया, लेकिन सरकार उन्हें तनख्वाह देगी। वहीं नगर परिषद की भी यही स्थिति है। नगर परिषद के लोग दुविधा में है कि अब काम किसने करना है। यहां प्रदेश सरकार ने एडीसी ऊना को नगर निगम आयुक्त का चार्ज दिया है। लेकिन उन्हें बताया नहीं गया कि उनका क्या कार्य रहेगा।
उन्होंने कहा कि पंचायतों में लोग जन्म प्रमाण पत्र, विवाह एवं मृत्यु रजिस्टर करवाने, राशन कार्ड एवं जमीन की केवाईसी करवाने पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें पता नहीं लग रहा कि अब यह कहां होगा। वहीं, ग्राम पंचायतों में प्रधानों ने जो विकास कार्य शुरू किए हैं, वे अधर में लटके हुए हैं। उन्होंने कहा कि पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह के माध्यम से भी मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू तक यह बात पहुंचाई गई है। अब जिलाधीश के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर सरकार फैसला नहीं लेती तो गांवों में जाकर लोगों को सरकार के कार्य से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जाएगा।
इस मौके पर जलग्रां टब्बा से पंचायत समिति सदस्य जंग बहादुर, जलग्रां टब्बा की पंचायत प्रधान सुदेश कुमारी, उपप्रधान रशपाल सिंह, मलाहत पंचायत प्रधान गुरचरण सिंह, टब्बा वार्ड से जिला परिषद सदस्य अशोक धीमान, अरनियाला से पंचायत समिति सदस्य नीलम कुमारी, अपर अरनियाला पंचायत से रेणु बाला, लोअर अरनियाला पंचायत उपप्रधान अजीत कुमार, कोटला कलां अप्पर पंचायत प्रधान सरजीवन, उपप्रधान संजय कुमार, अजनोली पंचायत के प्रधान सतपाल सैनी, उपप्रधान मंगल सिंह, लालसिंगी पंचायत के उपप्रधान हरबंस लाल, कोटला कलां लोअर की पंचायत प्रधान राज रानी, कुठार खुर्द की पंचायत प्रधान रचना देवी, उपप्रधान चमन लाल, रायंसरी पंचायत उपप्रधान दलजीत सिंह मौजूद रहे।