चिंतपूर्णी (ऊना)। माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर के लिए प्रस्तावित रोपवे परियोजना का व्यापार मंडल ने शुक्रवार को कड़ा विरोध किया। एडीबी ब्लॉक से मंदिर तक प्रस्तावित करीब 400 से 500 मीटर लंबे रोपवे के सर्वे के लिए पहुंची टीम को व्यापारियों ने मौके पर घेरकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और वर्तमान प्रस्तावित रूट पर योजना को तत्काल रोकने की मांग की।
व्यापार मंडल के प्रतिनिधिमंडल में लीगल एडवाइजर एडवोकेट रवि पराशर, निरंजन कालिया, संजीव शर्मा, महावीर कालिया, विक्रांत सूद और बाल कुंदन गर्ग सहित अन्य व्यापारी शामिल रहे। व्यापारियों का कहना है कि प्रस्तावित रोपवे मुख्य बाजार के ऊपर से होकर मंदिर की पहाड़ी तक जाएगा। उनका दावा है कि पहाड़ी कच्ची है और उस पर रोपवे की भारी संरचना व श्रद्धालुओं का अतिरिक्त दबाव भविष्य में खतरा पैदा कर सकता है।
व्यापारियों ने धार्मिक आस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसी पहाड़ी पर बाबा माई दास ने तपस्या की थी और यहीं प्राचीन वट वृक्ष स्थित है, जहां लाखों श्रद्धालु मौली बांधकर मन्नत मांगते हैं। उनका कहना है कि रोपवे निर्माण से इस ऐतिहासिक स्थल और मंदिर के मौजूदा स्वरूप को नुकसान पहुंचने की आशंका है, जिससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।
व्यापार मंडल ने प्रशासन को सुझाव दिया कि यदि रोपवे बनाना जरूरी है तो इसका रूट भरवाईं या किन्नू राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर से एडीबी ब्लॉक तक रखा जाए। उनका कहना है कि मंदिर के समीप पहले से ही सीमित स्थान है और वहां रोपवे स्टेशन बनने से भीड़ का दबाव बढ़ेगा तथा सुरक्षा संबंधी चुनौतियां खड़ी होंगी।
व्यापारियों ने कहा कि सरकार पहले मंदिर परिसर के विस्तार पर ध्यान दे। शिरडी, तिरुपति बालाजी और वैष्णो देवी की तर्ज पर बड़े प्रतीक्षा हॉल और सुविधाएं विकसित की जाएं। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार की प्रसाद योजना के तहत उपलब्ध धनराशि का उपयोग मंदिर परिसर के विस्तार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर किया जाए और मौजूदा रोपवे योजना पर पुनर्विचार किया जाए।