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Una News: होली के दिन निशान साहिब चढ़ाना मैड़ी मेले का सबसे बड़ा आकर्षण

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सारा मेला क्षेत्र ..जो बोले सो निहाल.. के नारों से गूंज उठेगा
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एक दूसरे को रंग लगाकर मेले की शुभकामनाएं देते हैं श्रद्धालु

गोपाल शर्मा

अंब (ऊना)। होली के दिन बाबा बड़भाग सिंह का मैड़ी में साक्षात वास माना गया है। लोग दस दिन तक चलने वाले मेले में होली के दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। मेले का सबसे बड़ा आकर्षण क्षेत्र के धार्मिक स्थलों पर पवित्र निशान साहिब चढ़ाया जाना है। इसे देखने के लिए लगभग एक लाख से अधिक श्रद्धालु मेला क्षेत्र में एकत्र होते हैं। जैसे-जैसे पवित्र निशान साहिब चढ़ाया जाएगा, सारा मेला क्षेत्र ..जो बोले सो निहाल के नारों से गूंज उठेगा। इसके बाद श्रद्धालु जमकर गुलाल उड़ाते हैं और आओ संतों खेलो बाबे दियां होलियां जैसे भजनों के साथ एक दूसरे को रंग लगाकर मेले की शुभकामनाएं देते हैं।
सोमवार सुबह क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थल में पवित्र झंडा चढ़ाए जाने की रस्म अदा किए जाने के लिए सभी धार्मिक संस्थाओं की तरफ से प्रबंध पूर्ण कर लिए गए हैं। इस मौके पर पहले झंडा विधिपूर्वक उतारा जाएगा। चोला बदले जाने से पूर्व झंडे को दूध गंगाजल से पवित्र स्नान करवाया जाएगा। इसके बाद झंडे पर नया चोला डालकर चढ़ाया जाएगा। इस प्रक्रिया में हजारों लोग भाग लेते हैं। चोला बदले जाने के बाद श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार झंडे पर रंग बिरंगे रुमाले, खिलौने, गुब्बारे इत्यादि बांधकर मन्नतें मांगते हैं। इसके बाद झंडा चढ़ाया जाता है। इस रस्म के दौरान पूरे मेला क्षेत्र के श्रद्धालुओं की निगाहें निशान साहिब पर टिकी रहती हैं और सारे मेला क्षेत्र में श्रद्धालु अपनी जगह हाथ जोड़कर इसके साक्षी बनते हैं।
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मान्यता के अनुसार लगभग 300 साल पूर्व बाबा वडभाग सिंह का जन्म पंजाब के करतारपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम राम सिंह और माता का नाम राजकौर था। अहमद शाह अब्दाली के 13वें आक्रमण के वक्त वे हिमाचल आ गए और यहां तप करने लगे। उस वक्त सारे इलाके में एक राक्षस वीर नाहर सिंह का अधिकार था जो लोगों को तंग करता था। इसे बाबा ने अपने तपोबल से वश में करके एक पिंजरे में कैद कर लिया। उसके माफी मांगने पर बाबा ने उससे वचन लिया कि अब वह लोगों को तंग नहीं करेगा और उनके दुख दूर करेगा। एक मान्यता यह भी है कि बाबा की आत्मा अपना शरीर त्यागकर घूमने चली जाती थी। एक बार जब बाबा की आत्मा अपना शीर छोड़कर गई और काफी देर तक अपने शरीर में वापस नहीं आई तो लोगों ने समझा की उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद लोगों ने उनकी देह का अंतिम संस्कार कर दिया। जब बाबा की आत्मा वापस आई तो पाया कि उनकी देह का अंतिम संस्कार किया जा चुका था। इसके बाद उनकी आत्मा ने अपनी विलाप करती हुई पत्नी को कहा कि वह एक स्थान को ताजा गोबर से लीपेगी और जब तक वह गोबर सूखेगा तब तक उनकी आत्मा उनके पास रहेगी। बाबा के मोह में एक दिन उनकी पत्नी ने गोबर में कोई ऐसा पदार्थ मिला दिया जिससे गोबर जल्दी न सूखे। यह देखकर बाबा की आत्मा रुष्ट हो गई। उनकी पत्नी के इस काम के लिए माफी मांगने पर बाबा ने कहा कि अब वह होली के दिन मैड़ी में अपने भक्तों के बीच साक्षात रहा करेंगे।
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होली के दिन निशान साहिब चढ़ाए जाने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु घरों को लौट जाते हैं। जबकि श्रद्धालु पंजे का प्रसाद लेने के लिए मेले में रुकते हैं। कहा जाता है कि होली में अपनी उपस्थिति दर्शाने के लिए इस ढके हुए प्रसाद में बाबा अपने हाथ का निशान लगा देते हैं। जिसे पंजे का प्रसाद कहा जाता है। 17 मार्च की मध्यरात्रि को 12 बजे क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक स्थलों में पंजे का प्रसाद वितरित किया जाएगा।
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