बारूद के ढेर पर बैठे ऊना शहर में आग से निपटने के लिए दमकल विभाग के इंतजाम सिफर दिखाई दे रहे हैं। दिवाली का सीजन सिर पर है, लेकिन शहर में एक भी हाईड्रेंट नहीं लगाया गया है। हालांकि, रक्कड़ में पांच हाइड्रेंट लगाए गए हैं जिनमें से मात्र एक ही चलता है और बाकी के चार हाइड्रेंट खराब पड़े हैं।
इसके चलते अग्निशमन विभाग की गाड़ियों के टैंकों को रीफिल करने की व्यवस्था नाकाफी है। शहर की तंग गलियां सबसे बड़ी मुसीबत हैं। आग की घटना के समय दमकल विभाग को उस समय समस्या का सामना करना पड़ता है, जब आपात स्थिति में तंग गलियों में गाड़ियां नहीं पहुंच पाती हैं। अग्निकांड के समय शहर में आपात सेवाएं न मिलने पर कई आशियाने जलकर राख हो चुके हैं। इसका मुख्य कारण शहर को योजनाबद्ध तरीके से नहीं बसाया गया है।
इसके चलते आग से निपटने के लिए दमकल विभाग को कई हथकंडे अपनाने पड़ते हैं, लेकिन तब तक आग की लपटें सबकुछ राख कर चुकी होती हैं। शहर के 11 वार्डों में 40 हजार से अधिक आबादी है। इनमें वार्ड पांच, छह, सात और आठ अति संवेदनशील हैं। यहां कस्बों की हालत काफी दयनीय है। वार्डों में कई भवनों की हालत भी बहुत खस्ता हो चुकी है। शहर की गलियों में दमकल विभाग की गाड़ियां न पहुंच पाने के कारण कई बार बेबस लोगों की आंखों के सामने ही उनके आशियाने जलकर राख हो जाते हैं। उधर, फायर अधिकारी सरवण कुमार शर्मा का कहना है कि शहर में आपात सेवाएं मुहैया करवाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि शहर में एक भी हाईड्रेंट नहीं है। तंग गलियों में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां गुजारना नामुमकिन हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि पटाखों के स्टाल आबादी के बाहर कहीं खुले मैदान में लगाएं। इसके अलावा पटाखे बेचने वाले व्यापारी स्टाल के पास एक रेत और पानी की बाल्टी भर कर रखें।