रोगियों को जीवनदान देने वाली एंबुलेंस क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में मालवाहक वाहन बनकर रह गई है। अस्पताल में सरकारी एंबुलेंस का इस्तेमाल रोगियों की बजाय सामान की ढुलाई में किया जा रहा है। ऊना अस्पताल में रोगियों को आपात स्थिति में एंबुलेंस से लाने की सुविधा मिले चाहे न मिले, लेकिन सामान की ढुलाई के लिए एंबुलेंस आसानी से मिल रही है। एंबुलेंस में अस्पताल की दवाइयों और अन्य सामान ढोया जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन की इस तरह की कार्यप्रणाली से लोगों में भी रोष है। अस्पताल प्रशासन रोगियों को एंबुलेंस सुविधा मुहैया करवाने में नाकाम साबित हुआ है। अस्पताल में आने वाले ज्यादातर इमरजेंसी मामलों को निजी वाहनों से ही लाया जा रहा है। अस्पताल में रोजाना सड़क दुर्घटना, जहर निगलने, डिलीवरी सहित अन्य इमरजेंसी मामले आने पर गंभीर हालत में रोगियों को पीजीआई सहित अन्य बड़े अस्पतालों को रेफर किए जाने पर जब अस्पताल प्रशासन से एंबुलेंस सेवा मांगते हैं तो अस्पताल प्रशासन स्टाफ की कमी का रोना-रोकर टालमटोल करता है। आपात स्थिति में रोगियों के लिए सिर्फ 108 सेवा वाहन और निजी वाहनों के माध्यम से ही जाना पड़ रहा है। उधर, कार्यकारी सीएमओ डॉ. निखिल शर्मा ने कहा कि मामला उनके ध्यान में नहीं है। लेकिन फिर भी मामले की गहनता से जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन रोगियों को सुविधाएं मुहैया करवाने में प्रयासरत है।
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जनहित मोर्चा ने जताया रोष
जनहित मोर्चा के प्रवक्ता राजीव भनोट ने कहा कि अस्पताल प्रशासन रोगियों को सुविधाएं मुहैया करवाने में नाकाम साबित हुआ है। अस्पताल में रोगियों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है और अस्पताल में एंबुलेंस सेवा तो महज नाममात्र है। एंबुलेंस सेवा सफेद हाथी साबित हो रही है। इसको लेकर जनहित मोर्चा आवाज बुलंद करेगा।