ऊना के अरविंद मार्ग पर मौजूद आवारा कुत्ता। संवाद
ऊना। शहर में आवारा कुत्तों की वर्तमान में कितनी संख्या है, इसकी पुख्ता जानकारी नगर परिषद के पास भी नहीं है। आलम यह है कि शहर में जब कोई आवारा कुत्ता किसी को काट लेता है तो उस समय नगर परिषद आनन-फानन में जल्द कार्रवाई करने का आश्वासन देती है। इस आश्वासन के कुछ दिन बाद उचित कदम उठाना भूल जाती है। इसके चलते शहर में आवारा आतंक पर लगाम कसने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं बन पा रही है।
आवारा कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया शुरू करने के लिए नगर परिषद ने कई बार टेंडर प्रक्रिया शुरू की। इस प्रक्रिया पर आगामी कोई कार्यवाही नहीं हो पाती है। इसके चलते आवारा कुत्तों की समस्या जस की तस बनी हुई है। शहर में आवारा कुत्तों की संख्या के बारे में नगर परिषद के पास कोई सही आंकड़ा नहीं है जबकि इस जानकारी के आधार पर ही नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाता है।
शहर में बस स्टैंड, पार्क, पार्किंग, बाजारों, होटलों व ढाबों के बाहर आवारा कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं। अगर कोई इन कुत्तों को हटाने का प्रयास भी करता है तो ये काटने के लिए दौड़ते हैं। पशुपालन विभाग की मानें तो एबीसी कार्यक्रम के तहत काम को अंजाम देने में सबसे अधिक दिक्कत कुत्तों को काबू करने में होती है। पशुपालन विभाग का काम केवल कुत्तों की नसबंदी व रैबीज वैक्सीनेशन करना है। नसबंदी के ऑपरेशन के बाद भी करीब सात दिन तक नसबंदी किए गए कुत्तों को देखभाल की जरूरत भी पड़ती है। ऐसे में यह जिम्मेदारी भी नगर परिषद की होती है। ऐसे में नगर परिषद की तरफ से अभी तक इस गंभीर समस्या से आमजन को छुटकारा दिलवाने के लिए अहम कदम उठाने की जरूरत है। करीब चार माह पहले नगर परिषद ने नसबंदी के लिए टेंडर प्रक्रिया भी की लेकिन अभी तक इस प्रक्रिया को नप के सुस्त रवैये के चलते पूरा नहीं किया जा सका है।
आवारा कुत्तों पर काबू करने के लिए नगर परिषद जल्द एक विशेष अभियान चलाएगी। इसके लिए नप जल्द बैठक भी करेगी। पुष्पा देवी, अध्यक्ष नगर परिषद ऊना ।