ऊना। जिला प्रशासन ने कोरोना संक्रमण के खिलाफ तैयारियां तेज कर दी हैं। निजी अस्पतालों को कोविड केयर सेंटर में बदलने की मुहिम छेड़ी गई है। साथ की वैकल्पिक व्यवस्था पर भी प्रशासन जोर दे रहा है। इसी कड़ी में नंदा अस्पताल ऊना को सेकेंडरी लेवल कोविड केयर हेल्थ सेंटर का दर्जा प्रदान कर दिया है। यहां पर कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए ऑक्सीजन युक्त 35 बेड की व्यवस्था होगी। डीसी राघव शर्मा ने कहा कि आने वाले दिनों में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।
ऐसे में उपमंडल स्तर पर डीसीसीसी बनाने और बेड क्षमता बढ़ाने की प्रयास जारी है। कोरोना संक्रमितों के लिए बेड क्षमता बढ़ाने को लेकर उपायुक्त राघव शर्मा, एडीसी डॉ. अमित कुमार शर्मा, सीएमओ डॉ. रमन कुमार शर्मा और डॉ. निखिल ने मिलकर शुक्रवार को जिला में विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया। अजौली में डॉ. शेरगिल अस्पताल, बाथू में कॉमन फेसिलिटी सेंटर, बाबा ढांगूवाले बीटन अस्पताल, अंबोटा पॉलीटेक्निक कॉलेज तथा दौलतपुर चौक में लक्खी अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करने के लिए टीम ने दौरा किया। उपायुक्त ने कहा कि लक्खी अस्पताल दौलतपुर चौक में एक फ्लोर पर ऑक्सीजन युक्त 20-25 बेड कोरोना संक्रमितों के लिए सुरक्षित रखने का अस्पताल प्रबंधन ने आश्वासन प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर कोविड-19 संक्रमितों को यहां इलाज के शिफ्ट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अंबोटा बहुतकनीकी संस्थान में एक छात्रावास में 50 बेड लगाने की व्यवस्था की जा सकती है और इसे डीसीसीसी की तरह इस्तेमाल किया जाएगा, जहां पर कम लक्षणों वाले मरीजों को रखा जा सकेगा। राघव शर्मा ने बताया कि बाबा ढांगूवाले अस्पताल बीटन और डॉ. शेरगिल अस्पताल में भी आवश्यकता के अनुसार कुछ बेड लगाने की व्यवस्था की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पंडोगा में प्रस्तावित मेक शिफ्ट अस्पताल में व्यवस्थाएं बनाने में देरी होती है तो बाथू के सामान्य सुविधा केंद्र में हॉल को इस्तेमाल करने की इंतजाम किया जाएगा। उन्होंने जरूरत के मुताबिक निजी अस्पतालों को भी कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।