ऊना। जिले की मंडियों में सरसों के साग की खेप पहुंचने लगी है। इस फसल को 20 रुपये प्रति गुच्छी के भाव मिल रहे हैं। सर्दियों के मौसम में सरसों के साग की मांग काफी रहती है, इसलिए लोग इसे हाथोंहाथ खरीद रहे हैं।
किसानों के अनुसार इस फसल को सितंबर और अक्तूबर के भीतर तैयार करना जरूरी होता है ताकि बाजार में शुरुआती मांग का लाभ मिल सके। लोग साग खरीदने से पहले यह परखना नहीं भूलते कि वह प्राकृतिक तरीके से तैयार हुआ है या फिर उसमें कीटनाशक व रासायनिक खाद का प्रयोग हुआ है। प्राकृतिक ढंग से तैयार साग को अधिक कीमत मिल रही है।
जानकारी के अनुसार हरोली और संतोषगढ़ क्षेत्र में सरसों के साग की सबसे अधिक खेप तैयार होती है। इसके साथ ही किसान पालक की खेती भी बड़े स्तर पर कर रहे हैं, क्योंकि साग तैयार करने में पालक की भी जरूरत होती है। इस कारण दोनों फसलें एक साथ बोई जाती हैं। वर्तमान में ऊना, संतोषगढ़ और टकारला मंडियों में सरसों के साग और पालक की खूब मांग बनी हुई है। वहीं, घर-द्वार पर सब्जी बेचने वाले भी इन दोनों सब्जियों की जमकर खरीद कर रहे हैं।
किसान प्रेम चंद, विक्रम सैनी, विपिन सैनी, विजय कुमार, सुरेंद्र सिंह और अश्विनी सैनी ने बताया कि सरसों का साग इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। यह 20 रुपये प्रति गुच्छी के भाव बिक रहा है। एक गुच्छी का वजन 100 से 150 ग्राम तक होता है और एक घर में औसतन तीन से चार गुच्छियां लग जाती हैं। किसानों के अनुसार पालक की भी अच्छी बिक्री हो रही है, जिससे प्रतिदिन 500 से 1500 रुपये तक की आय हो रही है।
जिला कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि जिले की भौगोलिक स्थिति हरी सब्जियों की खेती के लिए अनुकूल है। बीते समय में सिंचाई सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है, जिससे सब्जी उत्पादन में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इन दिनों किसान सरसों का साग मंडियों में बेच रहे हैं, जबकि आने वाले दिनों में मूली, गाजर, गोभी और हरे मटर जैसी सब्जियां भी बाजार में पहुंचेंगी। इससे किसानों को बेहतर आय प्राप्त होगी।