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मातृ-शिशु अस्पताल : बैठने के लिए मरीजों को कम पड़ रहीं कुर्सियां

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मातृ ​शिशु अस्पताल ऊना में बैंच न मिलने के चलते जमीन पर बैठी महिलाएं।संवाद
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करोड़ों खर्च कर बनाया नया भवन, बैठने की व्यवस्था करना भूला विभाग
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सेहत
फर्श पर बैठ कर मरीजों को करना पड़ रहा बारी का इंतजार
सुविधा को बेहतर बनाने के लिए किए जाएंगे प्रयास : एमएस
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के मातृ-शिशु अस्पताल परिसर में मरीजाें की सुविधा के लिए लगाई गई कुर्सियां कम पड़ रही हैं। वर्तमान में इस परिसर में केवल गायनी ओपीडी का ही संचालन हो रहा है। आगामी समय में जब परिसर में अन्य सुविधाएं शुरू होंगी ताे परेशानी बढ़ सकती है। आलम यह है कि महिलाओं को जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे महिलाओं की परेशानी बढ़ती जा रही है। जिला मुख्यालय स्थित मातृ-शिशु अस्पताल में सुबह से ही गर्भवती महिलाओं का पहुंचना शुरू हो जाता है। वर्तमान में दो गायनी ओपीडी इस परिसर में चलाई जा रही हैं। ऐसे में प्रबंधन की तरफ से मरीजों को बैठने के लिए जो व्यवस्था की गई है वह कम है। मजबूरी में महिलाओं को फर्श पर बैठकर ही अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। करोड़ों की लागत से बनाए गए मातृ-शिशु अस्पताल में आगामी समय में अन्य ओपीडी वार्डों को भी शुरू किया जाना है।
प्रबंधन ने पीने के पानी और अन्य सुविधाओं को परिसर में ही मुहैया करवाया है लेकिन बैठने की व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है। प्रबंधन की तरफ से ओपीडी के बाहर डिजिटल डिस्प्ले मशीनें लगाने की योजना भी तैयार की गई थी लेकिन धरातल पर अभी यह सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। अस्पताल में सबसे अधिक ओपीडी गायनी की ही रहती है।
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कोट्स
समस्या को जल्द दूर किया जाएगा। ओपीडी के बाहर अतिरिक्त कुर्सियां और बेंच लगाए जाएंगे ताकि लोगों को बैठने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
डाॅ. संजय मनकोटिया, चिकित्सा अधीक्षक क्षेत्रीय अस्पताल ऊना
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