ऊना। पंचायत चुनाव में मतदान ड्यूटी निभाने के बाद अब जिले के 100 से अधिक अध्यापक जनगणना कार्य में जुट गए हैं। शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों की लगातार विभिन्न सरकारी कार्यों में तैनाती को लेकर शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि स्कूलों में छुट्टियों के बीच भी अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाना शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
शिक्षक संगठनों के अनुसार हाल ही में पंचायत चुनावों के दौरान बड़ी संख्या में अध्यापकों की ड्यूटी लगाई गई थी और अब उन्हें जनगणना कार्य सौंप दिया गया है। इसके अलावा आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में भी शिक्षकों की तैनाती की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में पूरा शैक्षणिक सत्र गैर-शैक्षणिक कार्यों में ही व्यतीत होने की चिंता शिक्षकों ने जताई है।
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के जिला अध्यक्ष शशि सैनी ने कहा कि अध्यापक लगातार चुनाव, जनगणना और अन्य प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि यदि पूरा समय सरकारी ड्यूटियों में ही लग जाएगा तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कब दी जाएगी।
उन्होंने मांग उठाई कि चुनाव, जनगणना और विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे कार्यों में अन्य विभागों के कर्मचारियों की भी समान भागीदारी सुनिश्चित की जाए। बेहद जरूरी परिस्थितियों में ही अध्यापकों की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए ताकि स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों। शिक्षक संगठनों ने सरकार से शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने और अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत प्रदान करने की मांग की है।