ऊना। हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन द्वारा दुग्ध खरीद पर 20 लीटर की सीमा तय किए जाने और भुगतान में हो रही देरी को लेकर सोमवार को दुग्ध उत्पादकों का गुस्सा खुलकर सामने आया।
बड़ी संख्या में किसान भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती के नेतृत्व में झलेड़ा स्थित मिल्क फेडरेशन प्लांट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया।
किसानों का कहना है कि मिल्क फेडरेशन के नए आदेश के तहत अब एक किसान से प्रतिदिन अधिकतम 20 लीटर दूध ही खरीदा जाएगा। इसके साथ ही नए दुग्ध उत्पादकों को भी फिलहाल फेडरेशन से नहीं जोड़ा जा रहा है। किसानों के अनुसार इस निर्णय से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि उनके पास प्रतिदिन 20 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन होता है। ऐसे में शेष दूध की बिक्री कैसे होगी, इसे लेकर वे चिंतित हैं।
दुग्ध उत्पादकों ने बताया कि कई किसानों ने बैंक से ऋण लेकर डेयरी व्यवसाय शुरू किया है। यदि दूध की खरीद सीमित कर दी जाती है तो बैंक की किस्तें और अन्य खर्चों का भुगतान करना मुश्किल हो जाएगा। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि दूध का भुगतान भी समय पर नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि बकाया राशि का केवल कुछ हिस्सा ही जारी किया गया है, जबकि शेष भुगतान अभी भी लंबित है।
किसानों ने सरकार से मांग की कि 20 लीटर की कैपिंग तत्काल समाप्त की जाए, दूध का भुगतान समयबद्ध तरीके से किया जाए तथा नए दुग्ध उत्पादकों को भी मिल्क फेडरेशन से जोड़ा जाए ताकि डेयरी व्यवसाय प्रभावित न हो। इस दौरान विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने भी किसानों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर बातचीत की।