ऊना। जिले में पिछले कुछ दिनों से लगातार खराब चल रहे मौसम के बीच खरीफ सीजन की प्रमुख फसल मक्की की बिजाई किसानों के लिए चुनौती बनती जा रही है। शुक्रवार सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहने से किसानों की चिंता बढ़ गई। हालांकि दोपहर तक मौसम साफ रहने से किसान खेतों में डट गए। मौसम विभाग की ओर से बारिश की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में किसान बारिश शुरू होने से पहले अधिक से अधिक क्षेत्र में बिजाई का कार्य पूरा करने में जुटे हुए हैं।
कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में इस समय करीब 20 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्की की बिजाई का कार्य चल रहा है। विशेष रूप से ऊना के गैर सिंचित क्षेत्रों में बड़े स्तर पर मक्की बीजी जा रही है। इन इलाकों में खेती काफी हद तक वर्षा पर निर्भर रहती है, इसलिए किसान मौसम की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। किसानों में रजिंद्र कुमार, राम प्रकाश, तेजपाल, सोनू राणा, अभिषेक कुमार, रक्षपाल का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में लगातार बारिश होती है तो खेतों में नमी अधिक होने के कारण बिजाई कार्य प्रभावित हो सकता। कई क्षेत्रों में खेतों की तैयारी अभी भी जारी है। ऐसे में बारिश होने का असर फसल की समयबद्ध बुवाई पर पड़ सकता है।
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खाद की कमी बनी परेशानी
इस बार किसानों को मक्की की बिजाई के दौरान एक और समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मक्की फसल के लिए उपयोग की जाने वाली 12-32-16 खाद की पर्याप्त उपलब्धता नहीं हो पाई है। खाद की खेप समय पर नहीं पहुंचने के कारण अनेक किसानों ने बिना खाद डाले ही बिजाई शुरू कर दी है।
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खरपतवार नियंत्रण के लिए पहले ही किया छिड़काव
बिजाई से पहले किसानों ने खेतों में खरपतवार की समस्या को कम करने के लिए अग्रिम तैयारी भी की है। कई किसानों ने घास और खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए पहले ही कीटनाशकों एवं खरपतवार नाशकों का छिड़काव कर दिया ताकि फसल उगने के बाद अनावश्यक घास की समस्या कम रहे और उत्पादन प्रभावित न हो।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने किसानों को मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्य करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जहां खेत तैयार हैं, वहां समय पर बिजाई पूरी कर ली जाए जबकि अधिक नमी वाले क्षेत्रों में परिस्थितियों को देखते हुए ही कृषि कार्य किए जाएं।