बड़ूही (ऊना)। जिला ऊना में वन संपदा पर वन माफिया की नजरें लगातार गड़ी हुई हैं। जंगलों में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई के मामले सामने आने के बावजूद इस पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।
रामगढ़ वन रेंज में पिछले एक माह के दौरान तीन बड़े मामले सामने आने से वन विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं, गगरेट और नैहरियां क्षेत्रों में भी इसी अवधि में लकड़ी से लदी गाड़ियों को पकड़े जाने के नौ मामले सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जंगलों की रखवाली का जिम्मा संभालने वाले विभाग की निगरानी के बीच वन संपदा को नुकसान कैसे पहुंच रहा है।
रामगढ़ रेंज की अमरोह बीट में कुछ दिन पहले सड़क किनारे और जंगल के भीतर खैर के पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया था। आरोप है कि वनकाटू लाखों रुपये की वन संपदा काटकर ले गए लेकिन अभी तक इस मामले में आरोपियों का कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया है।
अमरोह बीट में ही खैर की अवैध कटाई का एक अन्य मामला भी सामने आया था। जंगल में छिपाकर रखी गई खैर की लकड़ी बरामद की गई, जिसकी कीमत करीब ढाई लाख रुपये आंकी गई थी।
हाल ही में रामगढ़ रेंज की चौकीमन्यार बीट के अंतर्गत पंजोड़ा में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान खैर के मोछे बरामद किए गए। इनकी कीमत करीब 43 हजार रुपये आंकी गई है।
जिला वन मंडलाधिकारी विकल्प यादव का कहना है की सबसे बड़ी समस्या कर्मचारियों के कमी की है।
रामगढ़ रेंज बहुत बड़ी और कर्मचारी कम हैं। फिर भी पूरी सतर्कता से वन क्षेत्र की निगरानी की जा रही है और उच्च अधिकारियों के समक्ष कर्मचारियों की कमी की बात रखी है।