46 पंचायतों में 28 पद लंबे समय से खाली
पंचायत प्रतिनिधियों में भी गहरा असंतोष
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के विकास खंड बंगाणा में कर्मचारियों की कमी के कारण पंचायतों के विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। लंबे समय से रिक्त पड़े पदों के चलते न केवल कार्यों की गति धीमी हुई है, बल्कि पंचायत प्रतिनिधियों में भी गहरा असंतोष व्याप्त है।
विकास खंड की कुल 46 पंचायतें वर्तमान में स्टाफ की कमी से जूझ रही हैं। यहां 28 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिनमें 10 पंचायत सचिव, सात तकनीकी सहायक, चार रोजगार ग्राम सेवक, दो कनिष्ठ अभियंता, एक समाज सेवा शिक्षा अधिकारी, एक एसडीओ और दो चपरासी शामिल हैं। पंचायत सचिवों की कमी के कारण एक-एक सचिव को दो-दो पंचायतों का अतिरिक्त कार्यभार संभालना पड़ रहा है। इससे कार्य का बोझ बढ़ने के साथ-साथ योजनाओं के क्रियान्वयन की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों में देरी हो रही है, मजदूरों के भुगतान में बाधाएं आ रही हैं और तकनीकी सहायकों के अभाव में कई निर्माण परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। वहीं, कनिष्ठ अभियंताओं के पद रिक्त होने से निर्माण कार्यों की निगरानी और स्वीकृति प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
पंचायत जनप्रतिनिधियों ने कर्मचारियों की कमी को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। बंगाणा पंचायत के प्रधान विजय शर्मा, उपप्रधान अजय शर्मा, हटली पंचायत के उपप्रधान सुरेंद्र शर्मा, थाना कलां के उपप्रधान ओमप्रकाश और मंदली पंचायत की प्रधान सुनीता देवी सहित अन्य प्रतिनिधियों ने बताया कि वे कई बार सरकार और विभाग के समक्ष रिक्त पदों को भरने की मांग उठा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रतिनिधियों का कहना है कि विकास कार्य ठप होने से जनता में रोष बढ़ रहा है और पंचायतें आवश्यक सेवाएं देने में असमर्थ हो रही हैं। वहीं स्थानीय ग्रामीणों का भी कहना है कि कर्मचारियों की कमी के कारण उनकी समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा है। प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर मनरेगा में कार्य आवंटन तक हर प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है। इस संबंध में विकास खंड अधिकारी केएल वर्मा ने बताया कि रिक्त पदों पर नियुक्ति सरकार के स्तर पर की जानी है। फिलहाल उन्हें इस विषय में कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है।