खेतों को भी बना रहीं रसायन मुक्त, 20 महिलाओं को जोड़कर कर रही आर्थिकी सुदृढ़
सतीश शर्मा
नारी (ऊना)। बंगाणा क्षेत्र की महिलाएं जीव अमृत बनाकर अपनी आर्थिकी को सशक्त कर रही हैं। इस प्रयोग से न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि खेत भी रसायन मुक्त बन रहे हैं, जिससे जैविक खेती को नया प्रोत्साहन मिला है। इसी दिशा में क्षेत्र की प्रवीण कुमारी ने जीव अमृत निर्माण को व्यवसाय के रूप में अपनाया है। आज वे बड़े स्तर पर कार्य कर प्रति माह 15 से 18 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रवीण कुमारी अब अन्य महिलाओं को भी इस कार्य से जोड़ रही हैं। वर्तमान में उन्होंने अपने साथ 20 महिलाओं का समूह तैयार किया है, जिनकी आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।
प्रवीण कुमारी बताती हैं कि जीव अमृत बनाने में बहुत कम खर्च आता है, जबकि स्थानीय किसान इसे पांच रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रहे हैं। लोगों में जैविक खेती के प्रति तेजी से रुचि बढ़ रही है। महिलाओं की मुख्य प्रशिक्षक कविता रानी ने बताया कि जीव अमृत तैयार करने के लिए 180 लीटर पानी में 20 लीटर गोमूत्र, 2 किलो बेसन, 2 किलो गुड़, एक किलो जंगली मिट्टी और देसी गाय का गोबर मिलाया जाता है। यह घोल तैयार होने के बाद बोतलों या कैनियों में पैक किया जाता है।
कविता रानी के अनुसार जीव अमृत कोई रासायनिक दवा नहीं है, बल्कि यह खेतों में उन लाभकारी जीवाणुओं को पुनर्जीवित करता है, जो कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से समाप्त हो जाते हैं। इस घोल का 10 दिन के भीतर छिड़काव करना आवश्यक होता है।
उन्होंने बताया कि अब इस प्रोडक्ट की मांग लगातार बढ़ रही है और यह किसानों एवं महिलाओं दोनों के लिए आर्थिक वरदान साबित हो रहा है। कविता रानी अन्य जिलों में भी महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उनके जीवन में सुधार लाने के प्रयास कर रही हैं।