लोग बोले-जो उम्मीदवार इस मामले में ठोस कार्ययोजना पेश करेगा, वही जनता का समर्थन हासिल करेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
दौलतपुर चौक (ऊना)। पंचायत चुनाव का रोस्टर जारी होते ही क्षेत्र में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार चुनाव पारंपरिक मुद्दों से हटकर सामाजिक सरोकारों की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि अब केवल वादों से नहीं, बल्कि जमीनी समस्याओं के ठोस समाधान से ही जीत संभव होगी।
ग्रामीणों देवन शर्मा, रोहित शर्मा, अनिल कुमार, सुदीप जसवाल, लाल सिंह, विनोद कुमार और अशोक कुमार का कहना है कि सड़क और पानी जैसे मुद्दे अब पहले जितने प्रभावी नहीं रहे। इसके बजाय नशे की बढ़ती समस्या सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर उभरी है। युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर गांवों में चिंता का माहौल है। ऐसे में नशा मुक्त गांव की मांग जोर पकड़ रही है।
इसके साथ ही कूड़ा-कचरा प्रबंधन भी एक गंभीर समस्या बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि गंदगी और कचरे के उचित निपटान की व्यवस्था न होने से स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं। ऐसे में स्वच्छता को लेकर ठोस योजना और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि जो उम्मीदवार नशे पर रोक लगाने और स्वच्छता व्यवस्था सुधारने को अपनी प्राथमिकता बनाएगा और ठोस कार्ययोजना पेश करेगा, वही जनता का समर्थन हासिल करेगा।
चुनावी माहौल में अब जो इन मुद्दों का रखेगा ध्यान, वही बनेगा गांव का प्रधान जैसे नारे नई दिशा दे रहे हैं। उम्मीदवार भी इन सामाजिक और जमीनी मुद्दों को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति तय कर रहे हैं।
स्पष्ट है कि इस बार पंचायत चुनाव केवल विकास के वादों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक सुधार और जागरूकता के मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाएंगे।