ऊना/अंब। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बढ़ रहे ईंधन के दामों का असर अब केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि खेतों से लेकर रसोई तक महंगाई की मार साफ दिखाई देने लगी है। डीजल महंगा होने से खेती-किसानी, माल ढुलाई और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। वहीं पेट्रोल के दाम बढ़ने से नौकरीपेशा, व्यापारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों का मासिक बजट भी बिगड़ने लगा है।
जिले में रोजमर्रा के कार्यों के लिए बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों पर निर्भर हैं। ऐसे में लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। वाहन चालकों का कहना है कि हर कुछ दिनों बाद बढ़ रहे दामों के कारण खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है। वहीं परिवहन खर्च बढ़ने का असर अब सब्जियों, फल, राशन और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी पड़ने लगा है।
किसानों का कहना है कि खेती में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर, पानी की मोटर और अन्य मशीनें डीजल पर आधारित हैं। ऐसे में डीजल महंगा होने से खेती की लागत बढ़ रही है। आने वाले समय में इसका असर फसलों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। इस पर लोगों ने अपने विचार इस प्रकार से साझा किए।
1 स्थानीय निवासी तरसेम लाल ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों ने परिवार का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। रोजाना नौकरी पर आने-जाने में पहले से ज्यादा खर्च हो रहा है।
2 स्वतंत्र किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर सीताराम ने कहा कि तेल के दामों में हो रही इस बढ़ोतरी का सबसे बुरा असर किसानों पर पड़ रहा है। सरकार से मांग की है कि किसानों को खेती के काम में इस्तेमाल होने वाले तेल पर विशेष सब्सिडी दी जाए। डीजल महंगा होने से खेती की लागत बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। इस संकट से राहत देने के लिए तुरंत एक ठोस और स्थायी नीति बनानी चाहिए।
3 गृहिणी प्रवीण ठाकुर ने कहा कि परिवहन महंगा होने का असर बाजार में दिखाई देने लगा है। सब्जियों और रसोई के सामान के दाम बढ़ रहे हैं जिससे घर का खर्च चलाना कठिन हो रहा है।
4 व्यापार मंडल ऊना के प्रधान प्रिंस राजपूत का कहना है कि माल ढुलाई महंगी होने से बाजार में वस्तुओं के दाम बढ़ना तय है। यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले दिनों में महंगाई का असर और अधिक देखने को मिल सकता है। सरकार से मांग है कि इन कीमतों को कम किया जाए।