मैहतपुर (ऊना )। ऊना जिला के औद्योगिक क्षेत्रों में कोविड काल के दौरान आर्थिक मंदी से मूर्छित हुए उद्योगों को आज दिन तक सरकार की ओर से संजीवनी नहीं मिल पाई है। इस कारण कई लघु और सूक्ष्म उद्योग आज भी मूर्छित अवस्था में हैं।
मंदी के बोझ तले दबे लघु उद्योगों के दोबारा चालू होने की उम्मीद इसलिए कम नजर आ रही है, क्योंकि एमएसएमई सेक्टर के लिए प्रदेश सरकार की उद्योग नीति में जब तक परिवर्तन नहीं होते। जब तक इन बीमार उद्योगों को सरकार की ओर से आर्थिक संजीवनी नहीं मिलेगी, तब तक बंद लघु और सूक्ष्म औद्योगिक इकाइयों का अपने पैरों पर खड़ा होना नामुमकिन सा दिखाई दे रहा है।
जिला इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. बीएन कश्यप तथा महासचिव सीएस कपूर के अनुसार आज प्रदेश भर के औद्योगिक क्षेत्रों में 60 से 70 और ऊना जिला में 30 से 40 फीसदी उद्योग बंद पड़े हैं। इन्हें पुनर्स्थापित कर करने की दिशा में सरकार को सार्थक पहल करनी होगी।
ध्यान रहे कि आज से करीब दो दशक पूर्व हिमाचल में इसलिए उद्योगपतियों ने अपने उद्योग स्थापित किए थे, कि बाकी राज्यों के मुकाबले हिमाचल में बिजली तथा सब्सिडी की कोई समस्या नहीं थी, लेकिन विद्युत दरों को बढ़ाने के साथ हुक्मरानों ने आईडीसी (इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट चार्जेस) जो 200 रुपये प्रति किलोवाट था। उसे बढ़ाकर दो हजार 500 कर दिया।
उद्योगपति मानते हैं कि इस बढ़े हुए आईडीसी के कारण एमएसएमई सेक्टर को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। इस मसले को विभिन्न उद्योग संघों ने सरकार के समक्ष अनेक बार गुहार लगाई, लेकिन आज दिन तक बिजली के दाम हों। एमएसएमई सेक्टर को सबसे बड़ी मार बिजली के दामों तथा घोषित सब्सिडी न मिलने से हो रही है।
सूत्र बताते हैं कि अमूमन बिजली के दाम 20 पैसे से 30 पैसे प्रति यूनिट तक ही बढ़ाए जाते रहे हैं। मगर एचपीईआरसी ने तो सीधे एक रुपये प्रति यूनिट दाम बढ़ाकर उद्योगों को झटका दे दिया। कुछ उद्योग संघ माननीय उच्च न्यायालय के शरण में गए तो कइयों ने प्रदेश सरकार के समक्ष शोर मचाया तब जाकर एक रुपये की सब्सिडी देने की घोषणा कर दी गई। इसे बाद में रद्द करके औद्योगिक इकाइयों की कमर तोड़ दी।