ऊना। बैलगाड़ी के पहिये... फिर साइकिल और मोटर वाहन... और अब रेलगाड़ी की रफ्तार। ऊना की 54 साल की विकास यात्रा ने परिवहन के हर दौर को अपनी आंखों के सामने बदलते देखा है। कभी पंजाब का हिस्सा रहा और तहसील की पहचान रखने वाला ऊना आज हिमाचल के एक विकसित जिले के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है। वर्ष 1972 में जिला ऊना की सड़कों पर करीब 250 से 300 मोटर वाहन थे लेकिन अगस्त, 2026 तक इनकी संख्या डेढ़ लाख के पार पहुंच गई है। नंगल से आई पहली बड़ी रेल लाइन ने ऊना के सफर को नया मोड़ दिया और आज वंदे भारत इसे दिल्ली की रफ्तार से जोड़ रही है।
54 साल में बदली परिवहन की यह तस्वीर केवल वाहनों की बढ़ती संख्या बढ़ती जरूरतों और विकास की तेज होती रफ्तार की कहानी बयां कर रही है। शुरूआत में इक्का-दुक्का ही बस चलती थी, वर्तमान में ऊना में हिमाचल पथ परिवहन की 133 बसें सड़कों पर दौड़ रहीं हैं।
वर्ष 1973 से ऊना में स्थानीय स्तर पर ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाने का मैनुअल रिकॉर्ड तैयार होना शुरू हुआ। शुरुआती वर्षों में अलग परिवहन कार्यालय की व्यवस्था विकसित नहीं हुई थी। लाइसेंसिंग से जुड़े काम एसडीएम अथवा उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से किए जाते थे। शुरुआती दौर में सरकारी विभागों के चालक, स्थानीय परिवहन सेवाओं से जुड़े चालक और कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर रखने वाले लोग प्रमुख रूप से लाइसेंस बनवाते थे। निजी वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ आम लोगों के लिए भी लाइसेंस की जरूरत तेजी से बढ़ी।
ऊना प्रदेश का पहला ब्रॉडगेज रेलवे स्टेशन
सड़क से आगे बढ़ते हुए ऊना के परिवहन इतिहास में 11 जनवरी 1991 को नंगल डैम से ऊना तक 14 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज रेल लाइन बनने के बाद पहली ट्रेन ऊना पहुंची। इस रेल लाइन परियोजना को 1981-82 के बजट में मंजूरी मिली थी। ऊना रेलवे स्टेशन हिमाचल प्रदेश का पहला ब्रॉडगेज रेलवे स्टेशन बना। बाद में रेल लाइन का विस्तार दौलतपुर चौक तक हुआ। जिला ऊना वंदे भारत एक्सप्रेस और जनशताब्दी जैसी ट्रेनों के माध्यम से दिल्ली से सीधे जुड़ा है। वर्तमान में ऊना रेलवे स्टेशन पर 11 रेल गाड़ियों का आवागमन हो रहा है। अब अंबाला और दिल्ली से ऊना होते हुए पंजाब के करतौली तक ट्रेन चल रहीं हैं।