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Una News: जिले के 100 स्कूलों में एक अध्यापक के सहारे चल रहीं आठ कक्षाएं

Fri, 26 Apr 2024 01:44 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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प्राथमिक शिक्षक संघ ने पहले प्रीप्राइमरी के लिए अध्यापक नियुक्त करने की उठाई मांग
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स्कूल प्रबंधन कमेटियां और अभिभावक बोले- प्री प्राइमरी कक्षाओं को अलग अध्यापक दें
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी,ऊना। जिला ऊना के तकरीबन 491 प्राथमिक स्कूलों में पहले ही अध्यापकों की भारी कमी चली आ रही है। वहीं, 100 के तकरीबन स्कूलों में एक ही अध्यापक पढ़ा रहा है। अब इन कुल 491 स्कूलों में से 240 विद्यालयों में नर्सरी क्लासेस भी शुरू की गई हैं। यानी कुल मिलाकर प्राथमिक पाठशाला में इन विद्यालयों में आठ कक्षाओं को पढ़ाने के लिए जहां अध्यापक एक ही है।
इस संबंधी प्राथमिक शिक्षक संघ का कहना है कि इन नर्सरी कक्षाओं के लिए एक तो अध्यापक अलग से चाहिए। वहीं, दूसरी शेष पांच कक्षाओं के लिए एक अध्यापक एक कक्षा का नियम लागू हो। यदि फिलहाल पुराने नियम की बात करें, तो 60 बच्चों तक दो अध्यापक, 60 से 90 तक तीन, 90 से 120 तक 4 और 120 से ऊपर पांच अध्यापकों का नियम है, जिसमें अभी तक विभाग ने नर्सरी कक्षाओं को शामिल नहीं किया है।
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प्राथमिक शिक्षक संघ जिला प्रधान राकेश शर्मा महासचिव सतेंद्र मिन्हास तथा सभी खंडों के प्रधानों ने मांग की है कि जब बच्चा स्कूल में आकर पढ़ रहा है, तो उसे भी एनरोलमेंट में शामिल किया जाए, जो कि अभी तक नर्सरी कक्षाओं को इस अनुपात से बाहर रखा गया है। संघ का कहना है कि सरकार शीघ्र नर्सरी कक्षाओं के लिए अलग नर्सरी अध्यापक नियुक्त करे, तभी अभिभावक सरकारी स्कूलों में नर्सरी में बच्चों को दाखिल करवाएंगे। संघ के जिला प्रधान का कहना है कि यदि भविष्य में सरकार युक्तिकरण का कोई निर्णय लेती है, तो उस समय भी छात्र अध्यापक अनुपात को ध्यान में रखकर ही लिया जाए, ताकि बच्चों के कैरियर की नींव मजबूत हो सके, जो कि बिना अध्यापकों से संभव नहीं है।
अभिभावक बोले- बिना अध्यापक प्राथमिक स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू करना न्यायसंगत नहीं
बच्चों के अभिभावकों सरला देवी, अश्विनी कुमार, शारदा देवी, महेश चंद, कृष्ण कुमार, साधुराम, शिव कुमार, आशा रानी का कहना है कि यदि सरकार अध्यापक का प्रावधान नहीं कर सकती, तो नर्सरी कक्षाएं प्राथमिक विद्यालयों में शुरू करना न्याय संगत नहीं है। पहले अध्यापकों का प्रावधान सरकार करे, उसके बाद इन कक्षाओं को चलाने का फैसला ले। बिना अध्यापकों के बच्चों का कॅरियर बनने की बजाय बिगड़ेगा।
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नर्सरी कक्षाओं और कक्षा पहली से पांचवीं तक जहां भी अध्यापकों की कमी है। सारा मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है। जब भी सरकार नियुक्तियां करेगी, तो उन्हें तुरंत अमल में लाया जाएगा।
- देवेंद्र चंदेल, उपशिक्षा निदेशक, एलिमेंट्री, ऊना
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