ऊना। इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों के आंकड़ों में हरोली विधानसभा क्षेत्र ने पूरे प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से जारी विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार हरोली की 5,553 महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक सहायता का लाभ मिला है। यह संख्या दूसरे स्थान पर रहे बंजार से 2,851 अधिक है। बंजार में 2,702 और चौपाल में 2,546 महिलाएं योजना की लाभार्थी बनी हैं।
तीन वर्षों में एक अगस्त 2026 तक योजना के तहत प्रदेश के विधानसभा क्षेत्रों में कुल 35,687 महिलाओं के खातों में 5.35 करोड़ रुपये डाले जा चुके हैं। अकेले हरोली की हिस्सेदारी करीब 15.56 प्रतिशत है। हरोली में करीब 83.30 लाख रुपये की राशि वितरित हुई है। कई विधानसभा क्षेत्रों में लाभार्थियों की संख्या 100 से भी कम है जबकि कुछ क्षेत्रों में यह आंकड़ा शून्य दर्ज किया गया है।
जिलावार तस्वीर में ऊना ने बढ़त बनाई है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिलाओं को योजना का लाभ दिया गया।
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो ऊना जिले की 7,280 महिला लाभार्थी हैं । जिला शिमला में 5,249, कुल्लू में 4,283, सिरमौर में 4,128, चंबा में 3,279 और बिलासपुर में 3,254 महिलाओं को योजना का लाभ मिला।
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इन क्षेत्रों में 500 से कम लाभार्थी
इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत चंबा 489, रेणुका जी 482, पच्छाद 451, रामपुर 408, भटियात 389, कुटलैहड़ 380, ठियोग 351, अर्की 341, गगरेट 310, किन्नौर 309, जुब्बल-कोटखाई 279, श्री नयना देवी जी 262, शिमला ग्रामीण 201, इंदौरा 164, जसवां-परागपुर 164, बल्ह 154, डलहौजी 151, शिमला शहरी 143, कुल्लू 135, कसुम्पटी 132, चुराह 130, सोलन 123, कसौली 86, धर्मशाला 64, मंडी सदर 45, नालागढ़ 31, दून 10 और द्रंग में महज 6 लाभार्थी दर्ज हैं। इसके अलावा कुछ विधानसभा क्षेत्रों में संख्या शून्य है।
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प्रदेश में कहां कितने लाभार्थी
हरोली 5553, बंजार 2702, चौपाल 2546, भरमौर 2120, आनी 1320, घुमारवीं 1258, पांवटा साहिब 1221, रोहड़ू 1189, जोगिंद्रनगर 1181, लाहौल-स्पीति 1171, सदर बिलासपुर 1154, शिलाई 1040, देहरा 990, नाहन 934, नगोटा 851, हमीरपुर 723, नाचन 556, ऊना 567 और सिराज 550।
इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से पात्र महिलाओं को आवेदन के आधार पर उनके बैंक खाते में 1500 रुपये डाले जा रहे हैं।
- सुमित खीमटा, निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग