संतोषगढ़ (ऊना)। सांपों के देवता के रूप में पूजे जाने वाले श्री गुग्गा जाहर वीर का जन्मोत्सव का पर्व पूरे जिलाभर में मंगलवार को पूरी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। रक्षाबंधन से लेकर कृष्ण जन्माष्टमी तक लोगों के घर घर जाकर दर्शन देने वाले गुग्गा जाहरवीर सोमवार को अपने निवास गुग्गा माड़ी को वापिस लौट गए।
मंगलवार को गुग्गा नवमीं पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूजन करने के लिए मंदिरों में एकत्रित हुए। गुग्गा के मंदिरों में लोगों ने पूजा अर्चना कर रोट प्रसाद चढ़ाया। जिला में बाबा बालक नाथ, राजा भृतहरि के मंदिरों में भी रोट-प्रसाद चढ़ाए गए। लोगों ने सुबह ही मंदिरों व गुग्गा माढ़ियों में पहुंच कर गुग्गा महाराज का आशीर्वाद लिया। रपोह और चक्कसरायं के गुग्गा मंदिरों में दिनभर भक्तों की भीड़ रही।
जिला के रिपोह मिसरा गांव में वर्ष 1897 में बने मंदिर में वार्षिक कार्यक्रम के तहत सुबह सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में झंडा चढ़ाने की रस्म अदा की गई। पेखूवेला में बने कड़प वाले गुग्गा मंदिर, बाबा बालक नाथ, मकरैड़ और डंगोली के प्रसिद्ध राजा भृतहरि मंदिरों में भी गुग्गा नवमीं के मौके पर धार्मिक कार्यक्रम हुए।