शिक्षक पात्रता परीक्षा को किया गया है अनिवार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हिमाचल प्रदेश साइंस मास्टर एसोसिएशन ने कर्मचारियों के हित में सरकार से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर पुनर्विचार याचिका दायर करने का आग्रह किया है। उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य कर दिया गया है और इसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर भी लागू किया गया है। संघ के सदस्यों का कहना है कि यह आदेश पूर्व नियुक्त अध्यापकों के हितों के विपरीत है, क्योंकि जिन शिक्षकों की नियुक्ति 2009 से पहले हुई थी, उन्होंने उस समय की प्रचलित शर्तों और नियमों के आधार पर ही सेवाएं ग्रहण की थीं। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों ने नियुक्ति के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लंबे समय तक निष्ठापूर्वक सेवाएं दी हैं। ऐसे में उन पर नए प्रावधान लागू करना अन्यायपूर्ण होगा।
एसोसिएशन के महासचिव भीम सिंह, वित्त सचिव संजीव कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष यशपाल, उपप्रधान निशिकांत, विकास कुमार, संयुक्त सचिव विपन सोहल और सलाहकार ओम प्रकाश ने संयुक्त बयान जारी कर सरकार से मांग की है कि वह सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करे और यह सुनिश्चित करे कि पूर्व नियुक्त अध्यापकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा से छूट दी जाए।