गगरेट (ऊना)। गगरेट में जनकल्याण और आमजन की सुविधा के लिए संचालित सरकारी कार्यालय से जुड़ा एक मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। पिछले करीब 36 महीनों से एसडीएम कार्यालय जिस निजी भवन में चल रहा है, उसके मालिक का आरोप है कि उन्हें आज तक भवन का किराया नहीं मिला। किराये के भुगतान के लिए लगातार प्रयासों के बाद मंगलवार को बुजुर्ग एसडीएम कार्यालय के बाहर अपनी ही भूमि पर शांतिपूर्ण धरने पर बैठने पहुंच गए। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची, हालांकि बाद में स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया।
भवन की मालकिन ब्रेन स्ट्रोक के बाद बेड रिडेन हैं और बिना सहारे चल-फिर नहीं सकतीं। उनके पति रशपाल वशिष्ठ, जो स्वयं वरिष्ठ नागरिक हैं, पत्नी की देखभाल के साथ पिछले तीन वर्षों से किराये के भुगतान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। परिवार का कहना है कि उन्होंने बुढ़ापे में नियमित आय की उम्मीद से अपना भवन प्रशासन को किराये पर दिया था लेकिन किराया मिलने की बजाय उन्हें केवल आश्वासन मिले।
रशपाल वशिष्ठ ने बताया कि उन्होंने कई बार एसडीएम कार्यालय में अधिकारियों से मुलाकात की। जिलाधीश को ऑनलाइन शिकायत भेजी और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी अपनी समस्या दर्ज करवाई लेकिन कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। जब हर स्तर पर प्रयास विफल हो गए तो गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्ण धरना ही उनके पास आखिरी विकल्प बचा।
जानकारी के अनुसार एसडीएम कार्यालय शुरू होने के बाद भवन में प्रशासन की जरूरत के अनुसार कुछ फेरबदल किए गए थे। बाद में नक्शा स्वीकृत होने और संबंधित फीस जमा होने की तकनीकी प्रक्रिया लंबित रहने के कारण किराया निर्धारण और भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। भवन मालिक का कहना है कि जब फेरबदल प्रशासन की आवश्यकता के अनुसार किए गए थे तो आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करवाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी थी।
मंगलवार को स्थानीय लोगों ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत करवाई। बताया गया कि नक्शा पास कराने की फीस जमा होने के बाद किराये के भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
एसडीएम गगरेट सौमिल गौतम ने कहा कि जैसे ही नक्शा पास होने की फीस जमा होगी, भवन मालिक को किराये का भुगतान तुरंत कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रयास रहेगा कि बकाया राशि का आधे से अधिक हिस्सा एकमुश्त जारी किया जाए।