थानाकलां (ऊना)। कुटलैहड़ क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं जिला स्तरीय पिपलू मेले में इस वर्ष एक नई और विशेष पहल देखने को मिली। पहली बार पूरे मेला क्षेत्र को भगवान नरसिंह के पवित्र ध्वजों से सजाया गया है।
बंगाणा बाजार, मुख्य मार्ग, मेला परिसर, प्रवेश द्वार, मंदिर मार्ग तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल तक हर ओर भगवान नरसिंह के ध्वज लहराते दिखाई दे रहे हैं। इन ध्वजों ने पूरे वातावरण को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मेले में प्रवेश करते ही ऐसा महसूस होता है मानो पूरा क्षेत्र भगवान नरसिंह की दिव्य छत्रछाया में आ गया हो। पिपलू मेला सदियों से भगवान नरसिंह की आस्था, लोक संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक रहा है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और मेले की सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं का हिस्सा बनते हैं।
इस वर्ष मेले की सजावट में भगवान नरसिंह के ध्वजों को प्रमुख स्थान देकर मेले के धार्मिक स्वरूप को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। जहां एक ओर रंग-बिरंगी सजावट लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है, वहीं भगवान नरसिंह के ध्वज श्रद्धालुओं को अपनी धार्मिक विरासत और परंपराओं से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
विशेष बात यह है कि बंगाणा बाजार से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल तक लगभग पूरे मार्ग पर एक समान रूप से भगवान नरसिंह के ध्वज लगाए गए हैं। दिन के समय ये ध्वज मेले की भव्यता को बढ़ाते हैं जबकि रात्रि में रोशनी के बीच इनकी सुंदरता और भी मनमोहक दिखाई देती है। श्रद्धालु, स्थानीय लोग और बाहर से आए पर्यटक इस अनूठी सजावट की सराहना करते हुए इसे मेले की सबसे आकर्षक विशेषताओं में से एक बता रहे हैं।
विधायक विवेक शर्मा ने कहा कि पिललू मेले के इतिहास में पहली बार भगवान नरसिंह के ध्वज इतने बड़े स्तर पर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल सजावट नहीं बल्कि अपनी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का माध्यम है।