ऊना। जिला मुख्यालय व आसपास के क्षेत्रों से लिए गए चिकन समेत छह खाद्य सामग्रियों के सैंपल फेल हो गए हैं। खाद्य सुरक्षा व विनियमन विभाग इस मामले में अब नोटिस देने की तैयारी में है। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई अमल पर लाई जाएगी।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी व उनकी टीम ने बीते मार्च व अप्रैल में ऊना शहर के एक ढाबे से तंदूर में पकाने से पहले मेरिनेट कर रखा गया चिकन, विभिन्न दुकानों से बिस्कुट, इमली, हलवाई की दुकान तलाई के रखा गया खाद्य तेल, मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर के सैंपल लिए थे।
इन्हें जांच के लिए सीडीएल लैब कंडाघाट भेजा गया। इस सप्ताह इन सैंपलों की रिपोर्ट में छह खाद्य पदार्थों के सैंपल फेल पाए गए हैं। कंडाघाट प्रयोगशाला की रिपोर्ट में इन खाद्य पदार्थों को सेहत के लिए घातक बताया गया है।
इस मामले पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने आगामी कार्रवाई करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। दुकानदारों व कारोबारियों को नोटिस देने की तैयारी है। नोटिस का यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो फूड सेफ्टी एक्ट के मुताबिक इन सभी के खिलाफ एडीएम की अदालत में केस चलाया जाएगा।
इस संबंध में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रियंका कश्यप ने कहा कि खाद्य तेल के सैंपल में टीपीसी 25 प्रतिशत से अधिक है। इसके अलावा लाल मिर्च पाउडर, चिकन, बिस्कुट, इमली व हल्दी पाउडर के सैंपल भी फेल पाए गए हैं।
खाद्य तेल में पाया गया 40 प्रतिशत टीपीसी
मिठाई की दुकान से लिए गए खाद्य तेल के सैंपल की रिपोर्ट में टपीसी (टोटल पोलर कंपाउंड) 40 प्रतिशत से अधिक पाया गया। खाद्य तेल में टीपीसी की मात्रा अधिक होने पर जब उसमें तले हुए उत्पाद का सेवन किया जाता है तो शरीर में गंदे फैट की मात्रा अधिक बढ़ती है। लगातार इस प्रकार के उत्पादों के सेवन से हृदयघात भी हो सकता है। खाद्य तेल में टीपीसी की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।