ऊना। प्रदेश के हजारों मछुआरों को सरकार ने राहत दी है। मुख्यमंत्री मछुआरा सहायता योजना के तहत अब जलाशयों से प्राप्त मछली की खरीद 100 रुपये प्रतिकिलो और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सुनिश्चित की जाएगी। जिला के कुटलैहड़ क्षेत्र में गोबिंदसागर झील पर निर्भर सैकड़ों परिवारों को लाभ मिलेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि नीलामी में मछली का भाव 100 रुपये प्रतिकिलो से कम रहता है तो अधिकतम 20 रुपये प्रतिकिलो तक का अंतर डीबीटी के माध्यम से सीधे मछुआरों के खातों में डाला जाएगा। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर मछली पालकों पर कम होगा।
सरकार ने जलाशयों पर लगने वाली रॉयल्टी 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत कर दी गई है। अगले वित्त वर्ष में इसे घटाकर एक प्रतिशत करने की घोषणा की गई है। इससे प्रदेश के छह हजार से अधिक जलाशय आधारित मछुआरों को फायदा होगा।
वर्षा ऋतु में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान आय हानि की भरपाई के लिए मछुआरा परिवारों को 3500 रुपये वार्षिक सम्मान निधि दी जाएगी। चार हजार नदीय मछुआरों को कॉस्ट नेट और तीन हजार जलाशय मछुआरों को गिल नेट पर 90 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। जरूरतमंद मछुआरों को नौका खरीद पर 70 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दी जाएगी। योजना के तहत 20 कोल्ड स्टोरेज, 10 फ्रीज-ड्राई इकाइयों और मछली परिवहन के लिए 20 रेफ्रिजरेटेड वाहनों पर भी 70 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
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क्या बोले लोग
एमएसपी लागू होने से अब मेहनत का सही दाम मिलेगा। मछली पालकों की अर्थिक स्थिति मजबूत मिलेगी।
-सुशील कुमार, लठियानी
कृष्ण कुमार ने यह मछुआरों के लिए भरोसेमंद कदम है। योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
-कृष्ण कुमार, लठियानी