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त्योहारों पर तड़का पड़ेगा महंगा, 80रुपये पहुंचा प्याज का भाव

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बंगाणा (ऊना)। महंगाई की मार के कारण आम आदमी की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। सब्जियों के दामों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। कोरोना की मार के साथ महंगाई की मार ने भी आम आदमी का जीना दुश्वार कर दिया है। आलू के भाव ने दुकानों पर जहां अर्द्धशतक लगाया है वहीं अब प्याज की कीमतें 80 रुपये प्रतिकिलो हो गया है। इससे यह दोनों ही सब्जियां गरीबों की थाली से दूर हो गई हैं।
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गरीबों के लिए सदैव से 10 रुपये प्रति किलो की दर से बिकने वाला आलू का भाव वर्तमान में 50 रुपये प्रति किलो की दर से बाजार में बिक रहा है। वहीं, प्याज की कीमतों में एकाएक उछाल आ गया है। जिला में प्याज को 80 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। शिमला मिर्च व मटर 120 रुपये प्रति किलो, गोभी 60 रुपये, टमाटर 60 रुपये, कद्दू व घीया 40 से 50 रुपये, अदरक 100 रुपये प्रति किलो की दर से जिले के बाजारों में रिटेल बेचा जा रहा है। प्याज की कीमतों में एकाएक बढ़ोतरी होने से आम आदमी के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई है। प्याज के दामों में आने वाले दिनों में और बढ़ोतरी हो सकती है। लगातार बढ़ रही महंगाई से आम लोगों का बजट गड़बड़ा गया है। गरीबों की थाली व आमजन की रसोई से हरी सब्जियां त्योहारी सीजन में गायब होने लगी हैं। सामान्य वर्ग के लोगों को कल तक जो सब्जी स्वादिष्ट लगती थी। वहीं, सब्जी लगातार बढ़ रही महंगाई की मार से उनकी पहुंच से दूर होती जा रही है। लोगों का कहना है कि सर्दियों का आगमन होते ही प्रत्येक सब्जी सस्ती हो जाती थी, लेकिन इस बार महंगी होती जा रही है।
अभिलाखा भलेति ने कहा कि लगता है महंगाई पर अंकुश लगाना किसी भी सरकार के बस की बात नहीं है। विभिन्न राजनीतिक दल महंगाई कम करने के सब्जबाग लोगों को दिखाकर दशकों से वोट हासिल करते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई भी नेता गरीबों का हितैषी साबित नहीं हुआ है। ज्योति मुच्छाली ने कहा कि सब्जियों के भाव इतने ज्यादा हो गए हैं कि उन्हें रसोई को संभालने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिससे उन्हें आधी-अधूरी सब्जियां बनानी पड़ रही है।
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