बंगाणा (ऊना)। उपमंडल बंगाणा क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों में इन दिनों मक्की की फसल को बचाने के लिए किसान दिन-रात ठीकरी पहरा देने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि दिन में बंदर और पक्षी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं जबकि रात में सुअरों तथा नील गायों के झुंड फसल को बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में किसानों के लिए अपनी फसल को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
बंगाणा क्षेत्र के पलाहटा, मलांगड़, बुधान, टकोली, बैरियां, कठोह, जोल, डीहर, धनेत, सुकडियाल, सरोह, तलाई, बोहरू, बौल, चुरडी सहित अन्य पंचायतों में किसान जंगली जानवरों के आतंक से परेशान हैं। किसानों में कुलतार चंद, ढाड़ी शर्मा, रमन कुमार,अशोक ठाकुर, बहादुर सिंह, संजीव कुमार अमर सिंह, राजेश ठाकुर सहित अन्य का कहना है कि मक्की की फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए दिन रात खेतों में मौजूद रहना पड़ रहा है।
दिन के समय महिलाएं डंडे लेकर खेतों में जंगली बंदर को भगाने का काम करने को मजबूर हैं, तो रात को पुरुष हाथों में डंडे तथा टार्च लेकर मक्की की फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए ठीकरी पहरा दे रहे हैं। इसके बावजूद जंगली जानवरों का कहर जारी है। दिन रात खेतों में ठीकरी पहरा देने के साथ साथ किसानों को जहरीले सांपों का डर हमेशा सताता रहता है। कई किसानों ने खेतों में ही अपना अस्थायी सोने का इंतजाम किया हुआ है। किसान नेता देसराज मोदगिल ने सरकार व प्रशासन से किसानों को मक्की की फसल के नुकसान का मुआवजा देने की गुहार लगाई है।