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Una News: 13 फीसदी सरकारी स्कूलों में मिलीं एक्सपायर दवाएं, सोशल ऑडिट में उजागर हुईं कई खामियां

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एक्सक्लूसिव
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जिले के 33 फीसदी स्कूलों में सुझाव पेटी नहीं, 87 फीसदी में काउंसलर का अभाव
एचपीयू की सोशल ऑडिट रिपोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

जसवीर ठाकुर


ऊना। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की सोशल ऑडिट टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में ऊना जिले के सरकारी स्कूलों की सुरक्षा एवं संरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार जिले के 13 प्रतिशत स्कूलों में एक्सपायर दवाएं मिली हैं, जबकि 33 प्रतिशत विद्यालयों में सुझाव पेटी (सजेशन बॉक्स) तक उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट ने स्कूलों में सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सोशल ऑडिट के दौरान यह भी पाया गया कि 33 प्रतिशत विद्यालयों में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवश्यक समितियों का गठन नहीं किया गया है। वहीं 4 प्रतिशत विद्यालयों में आपातकालीन चिकित्सा सहायता के संपर्क नंबर प्रदर्शित नहीं थे, जबकि 14 प्रतिशत स्कूलों में मेडिकल रूम, आवश्यक दवाइयों और प्राथमिक उपचार उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली।
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रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाएं भी कमजोर पाई गईं। जिले के 87 प्रतिशत विद्यालयों में विद्यार्थियों की काउंसिलिंग के लिए योग्य काउंसलर उपलब्ध नहीं हैं, जिससे विद्यार्थियों को मनोसामाजिक सहायता मिलने में कठिनाई हो सकती है।
समग्र शिक्षा और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत एचपीयू की सोशल ऑडिट टीम ने जिले के 752 सरकारी विद्यालयों में से 20 प्रतिशत स्कूलों का यादृच्छिक चयन कर मूल्यांकन किया। ऑडिट छह प्रमुख मानकों—आधारभूत संरचना, शिक्षक व्यवस्था, विद्यार्थी सुविधाएं, प्रशासन एवं वित्त, सुरक्षा एवं संरक्षा तथा व्यावसायिक शिक्षा—के आधार पर किया गया।
सोशल ऑडिट के निष्कर्षों पर जुलाई के पहले सप्ताह में लता मंगेशकर कला केंद्र में जिला स्तरीय जनसुनवाई भी आयोजित की गई, जिसमें स्कूल प्रबंधन समितियों के सदस्यों और जनप्रतिनिधियों ने शिक्षा व्यवस्था की कमियों को प्रमुखता से उठाया। जनसुनवाई का नेतृत्व सोशल ऑडिट के प्रधान अन्वेषक डॉ. रणधीर सिंह रांटा ने किया। जिले में वर्तमान में 141 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, 44 उच्च विद्यालय, 80 माध्यमिक विद्यालय और 466 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं।
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कोट
विभाग की ओर से स्कूलों का नियमित निरीक्षण किया जाता है। जहां भी कमियां पाई जाती हैं, वहां समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई के लिए संबंधित स्टाफ को आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं। - सोम लाल धीमान, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक
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