मैहतपुर (ऊना)। शारदीय नवरात्र मां भगवती की विशेष उपासना आराधना एवं अनुष्ठान के लिए अत्यंत ही पवित्र दिन माने गए हैं। इस वर्ष रविवार से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। प्रथम नवरात्र में मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। इससे पूर्व कलश स्थापना की जाती है। रविवार सुबह 6:21 से 6:55 बजे का समय कलश स्थापना के लिए विशेष मुहूर्त रहेगा। इसके उपरांत जो इस दौरान कलश स्थापित नहीं कर पाएंगे, वह रविवार को 11:44 से 12:30 बजे तक की अवधि में अभिजीत मुहूर्त के दौरान भी कलश स्थापित कर सकेंगे। शारदीय नवरात्र का समापन 20 अक्तूबर को विजय दशमी के दिन होगा। अष्टमी तिथि, 18 अक्तूबर सुबह से शुरू होगी और 19 अक्तूबर सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। पचांग के अनुसार संधि पूजा के लिए 18 अक्तूबर को सुबह 10:17 से 11:15 बजे तक का समय बताया गया है। कलश स्थापित करते समय स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छता के साथ पूजा सामग्री, नारियल, धूप दीप प्रज्वलित करके मां जगदम्बा का पूजन होगा। कुछ लोग इन नौ दिनों तक मां भगवती की अखण्ड ज्योति जलाकर आराधना करते हैं। कुछ लोग अपने घर में तो कुछ मंदिरों में शक्तिपीठों से पवित्र अखण्ड ज्योति लाकर स्थापित करते हैं। इन नौ दिनों में कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है। अनेक लोग इन नौ दिनों में अपने रसोई घर में लहसुन तथा प्याज का भी इस्तेमाल नहीं करते।
नवरात्र का आध्यात्मिक महत्व
मां दुर्गा की आराधना, उपासना से नकारात्मक ऊर्जा तथा मन की अशांति दूर होती है और सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं। सेवा समर्पण तथा भक्ति भाव जागृत होता है। व्यक्ति इंद्रियों को वश में करने के लिए सक्षम हो जाता है।
नौ दिन क्या करें
नित्य प्रति स्नान करने के उपरांत गणेश वंदना करके मां भगवती की पूजा अर्चना करनी चाहिए। समय और सुविधा को ध्यान में रखते हुए दुर्गा सप्तशती का पाठ तथा दुर्गा कवच का पाठ करते हुए मां भगवती की आरती उतारें। वशिष्ठ ज्योतिष सदन के अध्यक्ष अंकगणिताचार्य पंडित शशिपाल डोगरा के अनुसार शारदीय नवरात्र में मां भगवती की उपासना आराधना से घर में समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मकता आती है।