ऊना के रामपुर में बारिश न होने से पीली पड़ी गेहूं की फसल। संवाद
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ऊना। जिले में करीब दो माह से बारिश न होने के कारण 50 प्रतिशत गेहूं की फसल खराब होने की कगार पर है। खेतों में फसल पीली पड़ चुकी है। दिसंबर माह के अंतिम दिनों में किसानों को बारिश की आस थी, लेकिन बारिश न होने से फसल अब खराब होने लगी है। जहां सिंचाई सुविधा है वहां किसान जैसे-तैसे फसल को बचा रहे हैं। कुल मिलाकर सभी किसान बारिश के इंतजार में हैं। वहीं कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अगर अब भी बारिश हो जाती है तो गेहूं की फसल तैयार हो जाएगी।
जानकारी के अनुसार जिले का हर किसान गेहूं की फसल उगाता है। कई परिवार के गुजारे और कई मंडियों में बेचने के मकसद से अधिक जमीन पर भी गेहूं की बिजाई करते हैं। ऊना में इकलौती गेहूं ही ऐसी फसल है जो 30000 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर तैयार होती है, लेकिन जिले में 65 प्रतिशत से अधिक जमीन ऐसी है जहां सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में फसल बारिश के सहारे तैयार होती है। गेहूं की बिजाई नवंबर माह की शुरुआत में हुई। बिजाई के एक माह के भीतर इस फसल को पानी की आवश्यकता रहती है। गैर सिंचित क्षेत्रों में फसल किस हालत में होगी, यह अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में दो माह से बारिश नहीं हुई।
कभी बीमारी तो कभी मौसम की मार
ध्यान रहे कि जिले में इस साल मौसम के कारण गेहूं की फसल पर मार पड़ी है, जबकि बीते साल बीमारी की चपेट में आने के काफी फसल खराब हुई। ऐसे में लगातार दूसरे साल किसानों को गेहूं की फसल नुकसानदायक साबित हुई। क्षेत्र के किसान नरेश सैनी, वीरेंद्र सिंह, यशपाल ने बताया कि गेहूं हमारी एक मुख्य फसल है। ऐसा बहुत कम होता है कि बारिश न होने से फसल बर्बाद हुई हो। इस साल महंगे बीज और खाद का इस्तेमाल किया, लेकिन बदले में केवल नुकसान हाथ लगा है।
बंगाणा जैसे क्षेत्रों में गेहूं की फसल अधिक प्रभावित है। अगर जल्द बारिश होती है तो गेहूं की रुकी हुई वृद्धि दोबारा रफ्तार पकड़ लेगी। कई जगह फसल पीली पड़ चुकी है। उम्मीद है कि जल्द बारिश होगी, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न झेलनी पड़े।
कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग