चिंतपूर्णी के निकटवर्ती ज्वाल गांव की दीक्षा।
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चिंतपूर्णी (ऊना)। निकटवर्ती ज्वाल गांव की दीक्षा ने छोटी से उम्र में ही कड़ी मेहनत और एकाग्रता से इसरो में साइंटिस्ट इंजीनियर के पद को हासिल किया। दीक्षा ने जालंधर में एनआईटी से बीटेक के बाद एक साल तक पूरी एकाग्रता से परीक्षा के लिए पढ़ाई की।
इस दौरान कुछ नौकरियां भी हाथ लगीं लेकिन ठुकरा दीं। मन में जज्बा कुछ और कर दिखाने का था। मां वीना और पिता अनूप के घर जन्मी दीक्षा प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तक रोजाना पढ़ाई करतीं। मां गृहणी और पिता जालंधर में किताबों के प्रकाशन का काम करते हैं। दीक्षा ने लक्ष्य की ओर ध्यान केंद्रित करके मंजिल हासिल कर ली। दीक्षा छोटी से उम्र में मुकाम हासिल कर अन्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
गांव के प्रधान जोगिंदर सिंह, बीडीसी सदस्य ज्योति ठाकुर, प्रधान छपरोह शशि वाला, नर्वदा जसवाल, जीवन कालिया, संदीप, मनोज कुमार ने बताया कि दीक्षा क्षेत्र के बच्चों के लिए आगे बढ़ने के लिए उदाहरण है।
दीक्षा ने बताया कि वह ध्यान केंद्रित करके रोजाना 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई किया करती थी और कामयाबी मिल गई। वह दूसरों को भी यही प्रेरणा देने चाहती है कि जब भी लक्ष्य की ओर बढ़ो तो पूरी एकाग्रता के साथ। तभी मंजिल हासिल हो सकती है। परीक्षा के लिए जितने समय के लिए किताब लेकर बैठना है उतनी देर तक ध्यान भी पूरी तरह पढ़ाई में होना चाहिए।