जोल/ऊना। सावन के दूसरे सोमवार को चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र के ऐतिहासिक ध्यूंसर सदाशिव मंदिर तलमेहड़ा में भक्तों की भीड़ देखी गई। सदाशिव मंदिर उत्तर भारत का प्रसिद्ध धाम है।
यहां पर पूरा वर्ष पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। विशेषकर सावन माह में यहां का नजारा ही अलग होता है। सावन महीने में रविवार और सोमवार को सुबह से ही मंदिर के बाहर भोलेनाथ के दर्शनों के लिए हजारों लोगों का मेला लगा रहता है।
वहीं सोमवार सुबह से ही भक्तों की कतारें मंदिर परिसर में लग गईं। स्थानीय श्रद्धालु सुरेश मोदगिल, नरेश मोदगिल, सुभाष मोदगिल, जीवन मोदगिल, पंडित रामलोक शर्मा, डॉक्टर राकेश शर्मा ,एडवोकेट अमित साहनी, संजीव साहनी सहित अन्य भक्तों ने पूजा-अर्चना की। भक्तों ने भगवान शिव को जल चढ़ाकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना की।
श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, दूध, भांग, धतूरा, गंगाजल और फल, फूल भोले नाथ को अर्पित किए। इस दौरान मंदिर परिसर में बोल बम-बम और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा। दूरदराज से आए श्रद्धालु कांवड लेकर मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान शिव को जल अर्पित किया।
सदाशिव चैरिटेबल ट्रस्ट ध्यूंसर के चेयरमैन प्रवीण शर्मा, समूह ट्रस्टी सदस्यों और पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं। कई श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर रात्रि जागरण और रुद्राभिषेक में हिस्सा लिया। मंदिर पुजारी राकेश शर्मा ने बताया कि सावन माह में भंडारा करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं।