हरोली (ऊना)। बढ़ेडा पंचायत में श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने तालियां बजाकर ओर नाच-गाकर भजनों का आनंद लिया।
स्वामी अतुल कृष्ण महाराज ने कहा कि स्वर्ग और नर्क जीने के दो-सजयंग हैं। कोई चाहे यहीं संसार में स्वर्ग निर्मित कर ले, कोई चाहे यहीं नर्क में रहे। कोई चाहे सुबह स्वर्ग में रहे, सायं नर्क में रहे। हमारे जीवन में ऐसा ही रोज हो रहा है। मनुष्य जन्म एक अवसर है कुछ सृजन करने करने का। यहां न कुछ सत्य है और न ही असत्य। मानव की महिमा यही है कि जीवन वही हो जाएगा जैसा हम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब हम संसार की ओर दौड़ते हैं तो परिणाम असत्य के रूप में हाथ में आता है। इसके विपरीत जब हम प्रभु की ओर कदम बढ़ाते हैं तो मृत्यु भी आरती उतारती है।
उन्होंने कहा कि वर्णमाला के जिन अक्षरों से गालियां निर्मित होती हैं। उन्हीं अक्षरों से श्रीमद् भगवद्गीता का भी जन्म होता है। बस अक्षरों के संयोजन की बात है। वे ही शब्द गंदे हो जाते हैं, वे ही पुण्य और प्रशंसा की सुगंध भी ले आते हैं। यह हम पर निर्भर है, अपने भविष्य के हम ही निर्माता हैं। अतुल कृष्ण ने कहा कि संसार में अब और अवतार, शास्त्र, धर्म एवं पंथ की आवश्यकता नहीं है। जितने उपलब्ध हैं, हम उन्हीं से निहाल हो सकते हैं।
श्रीमद्भागवत कथा हमें सारे दोषों से मुक्त कर मानवीय जीवन मूल्यों की फिर से स्थापना करती है। सत्य, प्रेम, दया, करुणा, श्रद्धा और आस्था के वृक्ष सदैव ही फलते-फूलते देखे गए हैं। जबकि हिंसा, वैमनस्य, घृणा, कपट, अज्ञान और नास्तिकता का सर्वनाश निश्चित है। कथा में श्रीवामन अवतार, मत्स्यावतार, भगवान श्रीराम की कथा और श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाए गए।