नारी (ऊना)। पिछले कुछ वर्षों से हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से परीक्षा फीस ला रही है। 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के लिए ली जाने वाली फीस में केवल 20 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई जा रही है। मगर वास्तव में यह वृद्धि पिछले वर्षों की अपेक्षा डेढ़ गुना अधिक बढ़ा दी गई है। वृद्धि को लेकर अभिभावकों और बच्चों में रोष है।
पिछले वर्षों में बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं वर्ष में टर्म प्रणाली के तहत दो बार ली जाती थीं। इसमें एक टर्म के 10वीं की फीस 500 रुपये और 12वीं की 800 रुपये फीस रही। मगर अब टर्म प्रणाली के खत्म होने के बाद 10वीं का परीक्षा शुल्क 850 और 12वीं कक्षा का 1,150 रुपये कर दिया है। अभिभावकों में ममता देवी, सुशील कुमार, देवराज, दिनेश कुमार, सुरेश कुमार, एसएमसी कमेटी के सदस्य बालकृष्ण, पुष्पा देवी और सतपाल का कहना है कि अगर पूर्व में एक टर्म की परीक्षाओं की फीस 10वीं की 500 रुपये और 12वीं की 800 रुपये थी तो अब वर्ष में एक बार होने वाली परीक्षाओं में भी यही फीस वसूल करनी चाहिए। फीस नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
वहीं, अनुपूरक परीक्षा के लिए मैट्रिक के लिए 550 रुपये के स्थान पर 700 रुपये और 12वीं प्राइवेट बच्चों के एक अतिरिक्त विषय के पहले 550 रुपये और अब 700 रुपये हैं। हालांकि 10वीं के प्राइवेट छात्रों की एक या उससे अधिक इंप्रूवमेंट विषयों की फीस नहीं बदली गई है। जेबीटी डीईएलएड की फीस भी नियमित विद्यार्थियों के लिए 200 रुपये बढ़ाकर 1,000 रुपये कर दी गई है। इसी विषय में प्राइवेट परीक्षार्थियों के लिए 1,100 रुपये से बढ़ाकर 1,350 रुपये कर दी गई है।
गरीब बच्चों को ध्यान में रखा जाए
हिमाचल प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ के राज्य अध्यक्ष चंद्रकेश धीमान ने बताया की एक बार परीक्षा संचालन के दसवीं के 500 और 12वीं के 800 रुपये लिए जाते थे। बोर्ड बढ़ाई हुई फीस को जल्द वापस ले। जिला हेडमास्टर प्रिंसिपल संगठन के अध्यक्ष नरेश शर्मा का कहना है कि गरीब बच्चों पर आर्थिक बोझ को देखते हुए स्कूल शिक्षा बोर्ड बढ़ी हुई फीस वापस लेनी चाहिए। इसके अतिरिक्त प्रवक्ता संघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह, सी एंड बी अध्यापक संघ के जिला अध्यक्ष रमन सहोड़ ने भी सरकार से बढ़ी हुई फीस वापस लेने की मांग की है।
शिक्षा बोर्ड एक्ट के तहत हर दो वर्ष बाद शुल्क में बढ़ोतरी की जाती है। वार्षिक प्रणाली में फीस एक बार ली जाएगी। टर्म प्रणाली में यही फीस दो बार ली जाती थी। कुल मिलाकर 20 प्रतिशत की ही फीस में वृद्धि हुई है जोकि वाजिब है।
-डॉ. विशाल शर्मा, सचिव, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड