आयुष विभाग मरीजों को निशुल्क उपलब्ध करवा रहा विशेष काढ़ा
मरीजों को बेहतर उपचार सुविधा देने के लिए आयुष विभाग ने शुरू की प्रक्रिया
ओपीडी में लोगों को काढ़े को घर में भी प्रयोग करने के लिए किया जा रहा जागरूक
आशुतोष डोगरा
ऊना। आयुर्वेदिक अस्पताल में ओपीडी में आने वाले लोगों और उपचार के लिए दाखिल मरीजों को निशुल्क आयुष क्वाथ (काढ़ा) देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वर्तमान में यह सुविधा केवल आयुर्वेदिक अस्पतालों में ही शुरू की गई है। आगामी समय में इसे आयुष वेलनेस केंद्रों में भी शुरू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग के चिकित्सकों की ओर से इस प्रकार के औषधीय काढ़े को घर पर इस्तेमाल करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। इन काढ़ों को अस्पताल परिसर में ही तैयार कर लोगों को दिया जा रहा है। इसे तुलसी, गिलोय, शहद सहित विभिन्न आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से तैयार किया जाता है।
जिला आयुष विभाग ने लोगों को विभिन्न रोगों को दूर करने के लिए एक नई पहल की है। इस कड़ी में अस्पताल में दाखिल मरीजों को क्वाथ पीने के लिए मुहैया करवाया जा रहा है। इसके साथ ही ओपीडी में जांच के लिए आने वाले लोगों को उनकी बीमारी के हिसाब से यह काढ़े उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि विभाग की तरफ से मौसम के हिसाब से इन काढ़ों को तैयार किया जाता है। वर्तमान में सर्दियों के मौसम में सर्दी, खांसी, बुखार, जुकाम इन समस्याओं के पीड़ित सबसे अधिक मरीज पहुंचते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए इन दिनों शहद, गिलोय, अदरक, तुलसी, मुलेठी और अन्य आयुर्वेदिक दवाइयों का प्रयोग करके विशेष काढ़े को तैयार कर लोगों को अस्पताल परिसर में मुहैया करवाया जाएगा। इसके बाद मौसम बदलाव होने पर गर्मियों के हिसाब से तैयार कर लोगों को मुहैया करवाया जाएगा।
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काढ़े के लाभ
तुलसी आदि क्वाथ के माध्यम से सर्दी, खांसी, बुखार, जुकाम, गले में खराश, गले व श्वसन रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए लाभकारी है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। इसके अलावा गुडूच्यादि क्वाथ बुखार, पीलिया, मलेरिया, डेंगू, पित्त व लीवर से संबंधित अन्य रोगों को दूर करने में काफी सहायक होता है। इन दोनों काढ़ों का सेवन इन दिनों जिला आयुर्वेदिक अस्पताल व ईसपुर स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में निशुल्क करवाया जा रहा है।
कोट्स
जिले के दो आयुर्वेदिक अस्पतालों में ओपीडी में आने वाले मरीजों और तीमारदारों के लिए निशुल्क काढ़े की सुविधा शुरू कर दी गई है। वर्तमान में दो प्रकार के काढ़े दिए जा रहे हैं। मौसम बदलाव के साथ इन काढ़ों में प्रयोग होने वाली दवाइयों और जड़ी-बूटी में बदलाव भी किया जाएगा।
डॉ. किरण शर्मा, जिला आयुष अधिकारी ऊना