कुटलैहड़ क्षेत्र के कई गांवों में इन दिनों खैर के पेड़ों का कटान जड़ों सहित धड़ल्ले से किया जा रहा है। क्षेत्र के दर्जनों ठेकेदार वन विभाग के नियमों को ठेंगा दिखाकर चांदी कूटने में लगे हुए हैं। कुटलैहड़ के कई गांवों में ठेकेदारों की ओर से हजारों खैर के पेड़ों को जड़ों सहित काट दिया गया है। इसे वन विभाग की मिलीभगत कहें या ठेकेदरों की मनमानी। लेकिन, प्रदेश सरकार के कानून कुटलैहड़ क्षेत्र में नहीं चलते।
किसानों का आरोप है कि क्षेत्र के घुघन, ककराणा, पनेड कोठी, गहरा, छपरोह, बुढवार, बल्ह, सकौन आदि गांवों में जड़ों सहित खैर के पेड़ों को काटा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर तो सरकारी भूमि से भी खैर के पेड़ों का काट दिया गया है। पर्यावरण को लेकर एक ओर पेड़ों के न काटने की दुहाई दी जाती है, वहीं खैर के पेड़ों को जड़ों सहित उखाड़ा जाना वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है। किसानों का कहना कि यदि पेड़ को जमीन से कुछ ऊपर से काटा जाए तो इसी स्थान पर बहुत कम अवधि में पेड़ तैयार हो जाता है। यदि जड़ खोद कर निकाला जाए तो पेड़ का अस्तित्व ही मिट जाता है।
चंद सिक्कों की खातिर पर्यावरण से सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। किसानों सुशील कुमार, राजकुमार, देव कुमार, पुरुषोत्तम चंद, रणवीर सिंह, अजय कुमार, राकेश कुमार तथा वीरबल सिंह का आरोप है कि कुछ ठेकेदार विभाग की मिलीभगत से क्षेत्र में जड़ों सहित खैर के पेड़ों को बेखौफ काट रहे हैं। विभाग से शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है। इन लोगों ने प्रदेश सरकार से इस दिशा में उचित कदम उठाने की मांग की है। इस संबंध में आरओ रामगढ़धार एके कश्यप का कहना है कि जिन ठेकेदारों ने जड़ों सहित पेड़ काटे हैं, उन्हें जुर्माना किया गया है। यदि किसी अन्य गांव में जड़ों सहित कटान हो रहा है तो लोग उन्हें शिकायत करें। कानूनी कार्रवाई की जाएगी।