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Una News: स्कूलों में पोषण वाटिका तैयार करना बनी मात्र औपचारिकता

Tue, 06 Jan 2026 01:04 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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ऊना। जिले के सरकारी स्कूलों में पोषण युक्त मिड-डे मील तैयार करने के लिए हरी सब्जियां व अन्य औषधीय पौधों को उगाने की हिदायत जारी है। अधिकतर स्कूलों में ऐसी छोटी वाटिकाएं तैयार भी की गई लेकिन वे केवल औपचारिकता मात्र के लिए हैं। छोटे चार से पांच गमलों में पोषण सामग्री के पौधे उगाकर खानापूर्ति की जा रही है ताकि विभाग के औचक निरीक्षण में दिखा सकें कि उन्होंने आदेश का पालन किया है।
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जानकारी के अनुसार सरकारी स्कूलों में नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक मिड-डे-मील बच्चों को उपलब्ध कराने के आदेश हैं। इसमें किस दिन कौन सी सब्जी तैयार होनी है, इसका भी रोस्टर जारी किया गया है। सब्जियों को पौष्टिक बनाने के मकसद के स्कूलों को परिसर में कोई स्थान चिह्नित कर वहां पालक, धनिया, टमाटर करने के आदेश हैं, जिनकी मदद के खाने को अधिक पौष्टिक बनाया जा सके। धरातल की स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत है। विद्यार्थियों को न तो शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेशों के अनुरूप सब्जियों सहित प्रतिदिन भोजन खिलाया जा रहा है और न इसके लिए पर्याप्त स्थानों पर वाटिकाएं तैयार की गई हैं। अधिकतर स्कूलों ने इसके लिए प्लास्टिक के गमलों में पौधे उगा रखे हैं। सवाल यह है कि गिने-चुने गमलों में सब्जियां उगाकर प्रतिदिन 100 या इससे अधिक बच्चों के लिए भोजन कैसे तैयार हो पाएगा।

मिड-डे-मील फंड की देरी बड़ी समस्या
उधर मिड-डे मील के लिए स्कूलों को आने वाला फंड आधे से अधिक शैक्षणिक सत्र बीतने के बाद आता है। इससे स्कूल प्रबंधकों को उधार या अपनी जेब से राशन की व्यवस्था करनी पड़ती है। सवाल यह भी है कि उधार या अपनी जेब से पैसे लगाकर प्रतिदिन कोई कैसे बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था कर पाएगा।
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अभिभावक रवि दत्त चौधरी निवासी गांव बसाल ने कहा कि मिड-डे मील परियोजना के जरिये बच्चों को पोषण युक्त भोजन नहीं मिल पाता। केवल बच्चों का पेट भरना ही मकसद है। इसके लिए स्कूलों में वाटिकाएं भी नाममात्र की तैयार की गई हैं। बिना फंड स्कूल प्रबंधक भी कहां तक बोझ उठाएंगे। इसके लिए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही आवश्यक राशि जारी होनी चाहिए।
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मिड-डे मील इंचार्ज राजेंद्र सिंह ने बताया कि शैक्षणिक सत्र खत्म होने को है और फंड नहीं आया। बिना फंड के कैसे बच्चों को पोषित भोजन उपलब्ध कराएं। पोषण युक्त वाटिकाएं तैयार की गई हैं और उनकी स्थिति और बेहतर करने के लिए भी फंड चाहिए। उच्च अधिकारियों को इस ओर ध्यान देकर स्कूलों को पेश आ रही समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने कहा कि पोषित भोजन के लिए सभी स्कूल वाटिकाएं तैयार करने के आदेश को गंभीरता से लें। अगर कहीं पर्याप्त स्थान नहीं है तो प्लास्टिक के पॉट, गमले और छतों पर मिट्टी डालकर भी पौधे उगाए जा सकते हैं। शीतकालीन छुट्टियों के बाद विभाग की टीम सभी स्कूलों का औचक निरीक्षण कर पोषण वाटिकाओं की स्थिति भी जांचेगी।
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