ऊना। नगर निकायों चुनाव के बाद पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में भी ऊना जिला में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का दबदबा रहा है। कुल मिलाकर नगर निकायों के चुनावों के बाद पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में कांग्रेस को झटके के बाद एक और झटका लगा है। कांग्रेस सरकार सत्तासीन होने के बावजूद विधायक, बोर्ड व निगम के अध्यक्ष से लेकर मंत्री तक भी कोई अपने-अपने हलकों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को नहीं जीता पाए हैं। सत्ता के सेमीफाइनल के तौर पर यह चुनाव माने जाते हैं। कांग्रेस की जिला ऊना से उल्टी गणित शुरू हो गई है। जिला परिषद के 17 वार्डों में से 11 पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीते हैं जबकि पांच कांग्रेस समर्थक उम्मीदवार ही जीतकर आए हैं।
उपमुख्यमंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र में चार वार्डों में से तीन वार्डों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार जीतकर आए हैं। जिससे कांग्रेस को हरोली में थोडी सी संजीवनी अवश्य मिली है लेकिन बाकी विस क्षेत्रों में उम्मीद के मुताबिक निराशाजनक प्रदर्शन इन चुनावों में कांग्रेस के पक्ष में रहा है। गगरेट में कांग्रेस समर्थित एक भी जिला परिषद प्रत्याशी नहीं जीता है। विधायक राकेश कालिया के गगरेट विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का जिला परिषद के चुनाव में सूपड़ा साफ होकर रह गया है, तो वहीं दूसरी ओर सदर ऊना विधानसभा क्षेत्र में भी कांग्रेस समर्थित सभी प्रत्याशी हारे हैं। यहां पर भी कांग्रेस जिला परिषद के चुनाव में खाता तक नहीं खोल पाई है। कुटलैहड़ में विधायक विवेक शर्मा और चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र में विधायक सुदर्शन सिंह बबलू के कांग्रेस के एक-एक समर्थित उम्मीदवार जिला परिषद के चुनाव में जीतकर आए हैं। चिंतपूर्णी में दो भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीते हैं जबकि कुटलैहड़ विस क्षेत्र में मात्र एक ही कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार जीता है। यहां पर भाजपा के दो उम्मीदवार जीतकर सामने आए हैं और एक निर्दलीय आजाद उम्मीदवार के तौर पर महिला प्रत्याशी कंवर समर्थक की जीत मानी जा रही है।