जानकारी के अनुसार, कई स्कूलों ने स्वयं ही वर्दी का डिजाइन और कपड़े की गुणवत्ता तय कर दी है। कुछ स्कूलों में तो विशेष प्रकार के कपड़े और सिलाई के निर्देश दिए जा रहे हैं, जिससे वर्दी की कीमत और अधिक बढ़ जाती है। अभिभावकों का आरोप है कि उन्हें निर्धारित दुकानों से ही वर्दी खरीदने के लिए कहा जा रहा है, जहां कीमत बाजार से अधिक है।
अभिभावकों में कृष्णपाल, सुरेंद्र कुमार, अश्वनी शर्मा, रमेश कुमार, संजय, प्रवीण कौर, नीलम देवी, वंदना कुमारी ने सरकार से मांग की है कि वर्दी के लिए दी जाने वाली राशि को बढ़ाया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके। उनका कहना है कि वर्तमान समय में एक छात्र की पूरी वर्दी पर 1500 से 2500 रुपये तक का खर्च आ रहा है, जो गरीब और मध्य वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। वहीं, कुछ अभिभावकों ने यह भी सुझाव दिया है कि सभी स्कूलों के लिए एक समान वर्दी निर्धारित की जाए, जिससे खर्च में कमी आ सके और भ्रम की स्थिति भी समाप्त हो।
उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान का कहना है कि सरकार की ओर से निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत ही वर्दी की व्यवस्था की जाती है। यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अगर भविष्य में वर्दी राशि में बढ़ोतरी जैसा कोई आदेश प्राप्त होता है तो तत्काल प्रभाव से उसे लागू किया जाएगा।