नारी (ऊना)। श्रावण मास के पहले मंगलवार को डेरा बाबा रुद्रानंद आश्रम, नारी में परंपरागत चूरी उत्सव आस्था के साथ मनाया गया। आश्रम के महंत स्वामी हेमानंद महाराज के सान्निध्य में पांच प्राचीन पीपल वृक्षों की वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया तथा हजारों लोगों ने लंगर ग्रहण किया।
आश्रम से जुड़ी मान्यता के अनुसार लगभग पांच शताब्दी पूर्व इस स्थान पर पांच योगी महात्माओं ने जीवित समाधि ली थी।
बताया जाता है कि बाबा रुद्रानंद को उनके गुरु भवानी गिरि ने इस स्थान के महत्व से अवगत कराया था। धार्मिक मान्यता यह भी है कि पांडव अपने वनवास काल के दौरान एक रात्रि के लिए इसी स्थान पर ठहरे थे। परंपरा के अनुसार श्रावण मास के पहले मंगलवार को सबसे पहले अखंड धूने की पूजा की जाती है।
इसके बाद पांचों पीपल वृक्षों की वैदिक रीति से पूजा-अर्चना कर उन्हें घी, आटा और शक्कर से तैयार सवा मन चूरी का भोग लगाया जाता है। इस अवसर पर भगवान ब्रह्मा को रोट और ढाई मीटर कपड़े का लंगोट अर्पित किया जाता है। साथ ही पांचों पीपल वृक्षों के चारों ओर वस्त्र चढ़ाने की भी परंपरा निभाई जाती है।