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बाजार खोलने की छूट पर भी चिंतपूर्णी में दुकानें रही बंद

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भरवाईं (ऊना)। श्रद्धालुओं से गुलजार रहने वाला धार्मिक स्थल चिंतपूर्णी इन दिनों वीरान है। सोमवार को अनलॉक की प्रक्रिया के तहत जिले में बाजार पांच घंटे के लिए खुले रहे। इसके बावजूद चिंतपूर्णी बाजार बंद रहा। मंदिर बंद होने के कारण यहां कोई आवाजाही न होने के कारण व्यापारियों ने दुकानें नहीं खोलीं। दुकानदारों की मांग है कि मंदिर को भी खोल दिया जाए ताकि उनका व्यवसाय चल सके।
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चिंतपूर्णी धार्मिक स्थल होने के कारण यहां का सारा व्यवसाय मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं पर ही निर्भर है। मंदिर बंद होने के कारण होटल व्यवसायी और दुकानदारों की आर्थिक हालत पतली है। प्रदेश सरकार ने बाजारों को पांच घंटे खोलने की राहत तो दे दी है, लेकिन जब तक श्रद्धालु नहीं आएंगे तब तक दुकानदारी नहीं चलेगी।
कोरोना के चलते प्रदेश के तमाम मंदिर बंद हैं। अब सवाल है कि धार्मिक स्थलों पर प्रसाद, मनियारी विक्रेता, ढाबा, चाय और मिठाई व्यापारी आखिर दुकानें खोल भी दें तो उन्हें कोई लाभ नहीं होगा। बिजनेस एसोसिएट के प्रधान कुंदन गर्ग ने कहा कि चिंतपूर्णी की बात करें तो यहां व्यापारी और होटल व्यवसायी बिजली और पानी का बिल भरने में असमर्थ हैं। यहां बहुत से ऐसे छोटे दुकानदार हैं जिन्होंने बैंकों से व्यापार करने के लिए ऋण लिया हुआ है, लेकिन यह लोग बैंकों की किस्त देने में असमर्थ हैं। इसीलिए सरकार मंदिरों के नजदीक इन दुकानदारों के बारे में भी सोचना चाहिए।
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पुजारी बारीदार सभा के प्रधान रविंद्र छिंदा ने कहा कि चिंतपूर्णी के होटल व्यवसायियों और दुकानदारों का कारोबार पूरी तरह से चौपट हो गया है। अब कोरोना के मामले कम आ रहे हैं। इसके चलते सरकार को मंदिर को व्यवस्था बनाकर खोल देने चाहिए ताकि दुकानदारों का रोजगार चल सके।
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