ऊना। जिला ऊना में देर रात और तड़के न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे जाने से लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। विशेषकर स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे सर्दी की चपेट में आ रहे हैं। रोजाना क्षेत्रीय अस्पताल में 60 से 70 बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। कई बच्चे स्कूल बस के इंतजार में सर्दी से ठिठुरते नजर आते हैं। कुछ बच्चे आसपास कहीं जलती आग की तपिश का सहारा ले रहे हैं।
जिला में पड़ी रही कड़ाके ठंड के कारण बच्चे सर्दी की चपेट में आ रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में प्रतिदिन 60 से 70 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि अभिभावक बच्चों को गर्म कपड़े पहना रहे हैं, लेकिन भीषण सर्दी के कारण ये उपाय भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। विशेषकर निजी स्कूल के बच्चे सुबह छह बजे के आसपास घर के बाहर स्कूल बस लेने के लिए निकल पड़ते हैं। हालांकि स्कूल की समय सारणी सुबह साढ़े नौ बजे से ढाई और तीन बजे का है।
अभिभावक राजेश कुमार, सत्येंद्र सिंह, गुरविंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार, अमरीक सिंह, सोनिया, नीलम, अनुराधा ने बताया कि सुबह के समय भीषण ठंड में बच्चों को स्कूल भेजने का बिल्कुल मन नहीं करता। मगर उनका भविष्य देखते हुए ऐसा करने को मजबूर हैं। स्कूली वाहन तड़के ही पहुंच जाते हैं। बच्चों को छह बजे से पहले नींद से जगाकर तैयार करते हैं, जिससे वे बीमार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि सर्दी के मौसम में स्कूली वाहनों को लेकर दिशा निर्देश जारी किए जाएं, ताकि बच्चों को कुछ राहत मिले।
सर्दी के मौसम में स्कूलों का समय हर वर्ष वर्तमान जैसा ही रहा है। हालांकि इस बार न्यूनतम पारा बेहद कम है। वाहन सुविधा वाले स्कूल प्रबंधकों को चाहिए कि सर्दी के एक-दो माह तक व्यवस्था में बदलाव हो। इसको लेकर उच्चाधिकारियों से चर्चा की जाएगी। इसके बाद जैसे निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार आगामी फैसला लिया जाएगा।
-सोमलाल धीमान, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग